

लखनऊ में सपा कार्यालय के बाहर आत्मदाह का प्रयास: बहन के सम्मान और न्याय के लिए आग में झोंक दी जान
लखनऊ, 11 सितम्बर 2025 | NGV PRAKASH NEWS
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब अलीगढ़ के रहने वाले योगेश गोस्वामी ने खुद को आग के हवाले कर दिया। योगेश का कहना है कि उसकी बहन समा के साथ छेड़छाड़ और धोखाधड़ी हुई, लेकिन न्याय न मिलने की वजह से उसने यह कदम उठाया। इस घटना के वक्त सपा मुखिया अखिलेश यादव भी दफ्तर में मौजूद थे।
बहन के लिए भाई का संघर्ष
समा और योगेश का रिश्ता खून का नहीं, लेकिन खून से भी गहरा है। योगेश को समा की मां ने बचपन से पाला-पोसा और बेटे जैसा दुलार दिया। यही कारण है कि जब समा की इज्ज़त पर सवाल उठा और 6 लाख रुपये हड़पने का आरोप सामने आया, तो भाई योगेश न्याय के लिए दर-दर भटकता रहा।
योगेश का आरोप है कि अलीगढ़ के ठेकेदार समीम, फहीम और एक अन्य व्यक्ति ने बहन से छेड़छाड़ की और 6 लाख रुपये हड़प लिए। परिवार ने पुलिस और प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूर होकर उसने मुख्यमंत्री से लेकर अधिकारियों और यहां तक कि सपा कार्यालय तक का दरवाज़ा खटखटाया, पर न्याय न मिला।
लखनऊ में आत्मदाह का प्रयास
गवाहों के मुताबिक, योगेश ने समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर ज्वलनशील पदार्थ डालकर खुद को आग लगा ली। मौके पर अफरातफरी मच गई। राहगीरों और पुलिस ने किसी तरह आग बुझाई और योगेश को सिविल अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने बताया कि उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
यह आत्मदाह केवल एक घटना नहीं, बल्कि उस गहरे दर्द का प्रतीक है, जो उन परिवारों को झेलना पड़ता है, जिन्हें न्याय के लिए बार-बार ठोकरें खानी पड़ती हैं।
अखिलेश यादव का हमला
घटना के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर बीजेपी सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने लिखा—
“निर्मम बीजेपी सरकार से हताश होकर एक युवा ने आत्मदाह का प्रयास किया है। यह बेहद दर्दनाक है। घायल युवक को बेहतर इलाज और न्याय मिलना चाहिए। नाइंसाफी, न उम्मीदगी और निराशा बीजेपी सरकार की पहचान बन गई है।”
पुलिस का बयान
दूसरी ओर, डीसीपी आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि प्राथमिक जांच में मामला पैसे के लेन-देन से जुड़ा है। तहरीर कॉपी में छेड़छाड़ का उल्लेख नहीं है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और तथ्यों की पुष्टि के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
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- यह मामला केवल एक व्यक्ति के आत्मदाह प्रयास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम पर सवाल उठाता है।
- एक बहन के सम्मान और न्याय के लिए भाई का इतना बड़ा कदम यह दर्शाता है कि जब शिकायतों को समय पर नहीं सुना जाता, तो पीड़ित किस हद तक मजबूर हो जाते हैं।
- दूसरी ओर, पुलिस का बयान और सपा प्रमुख का आरोप इस घटना को राजनीतिक रंग भी दे रहा है।
👉 सवाल यह है कि क्या योगेश को उसकी बहन के लिए न्याय मिलेगा, या यह मामला भी राजनीति और प्रशासनिक बयानबाज़ी के बीच कहीं दब जाएगा?
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