

मुंबई अटैक पर चिदंबरम का बड़ा खुलासा: अमेरिका के दबाव में नहीं हुआ पाकिस्तान पर एक्शन
नई दिल्ली,
30 सितंबर 2025,
26/11 मुंबई हमले के 17 साल बाद देश की राजनीति में एक बड़ा बयान सामने आया है। पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने स्वीकार किया है कि यूपीए सरकार ने उस समय अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई नहीं की थी।
चिदंबरम ने एक टीवी इंटरव्यू में बताया कि 26 नवंबर 2008 के आतंकी हमलों के बाद उनके मन में “बदले की कार्रवाई” का विचार आया था, लेकिन विदेश मंत्रालय और अमेरिकी दबाव की वजह से यह कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा, “हमले के दो-तीन दिन बाद अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस दिल्ली आईं और उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत को जवाबी कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। उस समय पूरी दुनिया हमें युद्ध न करने की सलाह दे रही थी।”
चिदंबरम ने आगे कहा कि हमले के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अन्य शीर्ष नेतृत्व के साथ सैन्य कार्रवाई को लेकर गहन चर्चा हुई थी, लेकिन अंततः विदेश मंत्रालय और आईएफएस अधिकारियों की सलाह पर हमला न करने का फैसला लिया गया।
मुंबई अटैक क्या था?
26 नवंबर 2008 को पाकिस्तान से आए 10 आतंकियों ने मुंबई को निशाना बनाया। तीन दिन तक चले इस नरसंहार में 166 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए। आतंकी छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट, लियोपोल्ड कैफे, कामा हॉस्पिटल और नरीमन हाउस जैसे स्थानों पर ताबड़तोड़ हमले करते रहे। सुरक्षा बलों ने नौ आतंकियों को मार गिराया, जबकि एकमात्र जिंदा पकड़ा गया आतंकी अजमल कसाब 2012 में फांसी पर चढ़ा दिया गया।
इस हमले के बाद तत्कालीन गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने इस्तीफा दिया और पी. चिदंबरम को वित्त मंत्रालय से हटाकर गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। चिदंबरम ने माना कि वे इस बदलाव से खुश नहीं थे क्योंकि वे चुनाव से पहले वित्त मंत्रालय छोड़ना नहीं चाहते थे।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
चिदंबरम के इस बयान पर सियासत भी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि “देश पहले से जानता था कि यूपीए सरकार ने मुंबई हमले के मामले को विदेशी शक्तियों के दबाव में गलत तरीके से संभाला। चिदंबरम का यह कबूलनामा उसी सच्चाई की पुष्टि करता है।”
एनजीवी प्रकाश न्यूज़ (NGV PRAKASH NEWS)




