अजूबा : हाथ में कॉपर टी लिए पैदा हुआ बच्चा..

NGV PRAKASH NEWS


“हजार बर्क़ गिरे लाख आंधियां उठें…” कॉपर-टी के बावजूद पैदा हुआ बच्चा, हाथ में थामी ‘जीत की ट्रॉफी’

अक्टूबर 02, 2025, ब्राज़ील।
ब्राजील के नेरोपोलिस शहर के हॉस्पिटल साग्रादो कोराकाओ डी जीसस में जन्मे एक बच्चे ने दुनिया भर में सुर्खियां बटोर ली हैं। जन्म लेते ही इस नवजात ने हाथ में कॉपर-आईयूडी (कॉपर-टी) थाम रखा था—वही गर्भनिरोधक उपकरण, जिसे उसकी मां ने गर्भधारण रोकने के लिए लगवाया था।

मशहूर शायर साहिर लुधियानवी का शेर—
“हजार बर्क़ गिरे लाख आंधियां उठें,
वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं…”

—मानो इस बच्चे की कहानी पर सटीक बैठता है।

दरअसल, बच्चे की मां क्वेइडी अराउजो डी ओलिवेरा ने लगभग दो साल पहले गर्भनिरोधक के रूप में कॉपर-आईयूडी लगवाया था। यह तरीका गर्भ रोकने के सबसे सुरक्षित उपायों में गिना जाता है और इसकी सफलता दर 99% से भी अधिक है। लेकिन किस्मत ने कुछ और लिखा था। नियमित जांच के दौरान क्वेइडी को पता चला कि वे गर्भवती हैं।

डिलीवरी के वक्त डॉक्टर नतालिया रोड्रिग्स ने मज़ाकिया अंदाज में आईयूडी को नवजात के हाथ में थमा दिया और तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की। कैप्शन था— “मेरी जीत की ट्रॉफी, वो आईयूडी जो मुझे रोक नहीं सका।” यह तस्वीर और वीडियो वायरल होते ही चर्चा का विषय बन गए।

आईयूडी क्या है और कैसे काम करता है?

आईयूडी (Intrauterine Device) एक छोटा T-आकार का उपकरण है जिसे गर्भाशय में लगाया जाता है। इसके दो प्रकार होते हैं—

  1. कॉपर आईयूडी (Copper-T) : यह स्पर्म को नष्ट कर गर्भधारण की संभावना लगभग समाप्त कर देता है।
  2. हार्मोनल आईयूडी (IUS) : यह प्रोजेस्टिन हार्मोन छोड़कर गर्भाशय की परत को पतला करता है, जिससे गर्भधारण मुश्किल हो जाता है।

कॉपर आईयूडी की असफलता दर केवल 0.6% है। यानी लाखों महिलाओं में से सिर्फ कुछ ही मामलों में गर्भ ठहरता है।

चुनौतीपूर्ण गर्भावस्था

क्वेइडी की गर्भावस्था आसान नहीं रही। आईयूडी गर्भाशय में होने के कारण इसे हटाना बेहद जोखिम भरा था। डॉक्टरों ने इसे वहीं रहने दिया, लेकिन गर्भकाल के दौरान क्वेइडी को ब्लीडिंग और गर्भनाल संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा। आखिरकार, सभी चुनौतियों को पार करते हुए उनका बेटा माथेयुस गेब्रियल स्वस्थ पैदा हुआ।

डॉक्टरों के अनुसार यह “एक मेडिकल मिरेकल” है। बच्चे का जन्म न सिर्फ परिवार के लिए, बल्कि मेडिकल साइंस के लिए भी एक अद्भुत घटना बन गया है।


NGV PRAKASH NEWS

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *