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बिच्छू से बन रहा जानलेवा नशा — पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बढ़ रही खतरनाक लत, असर तीन दिन तक
NGV PRAKASH NEWS | 24 अक्टूबर 2025
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के कुछ सीमावर्ती इलाकों में एक बेहद खतरनाक और अजीब नशे की लत तेजी से फैल रही है। यहां कुछ लोग बिच्छू (Scorpion) को सुखाकर, जलाकर या उसका धुआं तम्बाकू में मिलाकर नशे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस नशे का असर 10 घंटे से लेकर तीन दिनों तक रहता है और यह हेरोइन से भी कई गुना अधिक घातक साबित हो सकता है। कई मामलों में लोगों की जान तक चली गई है।
🔹 नशे की हैरान करने वाली प्रक्रिया
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा (Khyber Pakhtunkhwa), क्वेटा, और अफगानिस्तान के कुछ सीमावर्ती गांवों में यह चलन वर्षों से मौजूद है। नशेड़ी लोग बिछ्छू को पहले धूप में सुखाते हैं, फिर उसे कोयले पर जलाकर उसका धुआं सूंघते हैं। कुछ लोग जले हुए बिछ्छू का पाउडर बनाकर उसे तम्बाकू या गांजे में मिलाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बिच्छू को जलाने पर जो धुआं निकलता है, उसमें विष के तत्व (toxins) मौजूद रहते हैं, जो सीधे फेफड़ों और मस्तिष्क पर असर डालते हैं। सेवन करने वाले व्यक्ति को पहले तीव्र दर्द और जलन महसूस होती है, उसके बाद अजीब तरह की ‘उड़ान’ जैसी अनुभूति होती है — जिसमें व्यक्ति हकीकत से कटकर भ्रम और मतिभ्रम की स्थिति में चला जाता है।
🔹 असर: 10 घंटे से लेकर 3 दिन तक
रिपोर्टों के अनुसार, इस नशे का असर 10 घंटे से लेकर 72 घंटे (3 दिन) तक बना रह सकता है। इस दौरान व्यक्ति को जागते हुए भी स्वप्न जैसी अनुभूति होती है। कई बार यह नशा इतना तीव्र होता है कि व्यक्ति पूरी तरह बेहोश या पक्षाघात जैसी स्थिति में चला जाता है। चिकित्सकों के अनुसार, बार-बार ऐसा करने से शरीर में विष जमा हो जाता है, जो तंत्रिका तंत्र, हृदय और फेफड़ों पर गंभीर प्रभाव डालता है।
🔹 हेरोइन से भी खतरनाक
विशेषज्ञ बताते हैं कि बिच्छू का विष में न्यूरोटॉक्सिन (Neurotoxin) नामक रासायनिक तत्व होता है, जो मस्तिष्क की नसों को प्रभावित करता है। यही कारण है कि यह नशा अस्थायी रूप से ‘हाई’ तो देता है, लेकिन इसके बाद शरीर को गंभीर क्षति पहुंचाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह असर हेरोइन, कोकेन या अफीम जैसे नशों से भी अधिक अनिश्चित और घातक है, क्योंकि विष की मात्रा हर बिछ्छू में अलग-अलग होती है।
🔹 गरीबी और बेरोजगारी से जुड़ा सामाजिक पहलू
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह नशा आमतौर पर उन गरीब इलाकों में फैल रहा है, जहां पारंपरिक नशे जैसे हेरोइन या चरस महंगे हैं और आसानी से उपलब्ध नहीं। बेरोजगारी और निराशा में घिरे युवा सस्ते विकल्प के रूप में बिच्छू का नशा अपना रहे हैं। कई मामलों में किशोर भी इस लत की चपेट में आ चुके हैं।
स्थानीय मीडिया ने इस पर चिंता जताई है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह नशा गांवों और छोटे कस्बों में तेजी से फैल रहा है। कुछ स्थानीय डॉक्टरों ने बताया कि लत छोड़ने की स्थिति में मरीजों में पागलपन जैसे लक्षण, हाथ-पैरों में ऐंठन, दिल की धड़कन बढ़ना और ब्लड प्रेशर गिरने जैसी समस्याएं देखी गई हैं।
🔹 स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
पेशावर मेडिकल यूनिवर्सिटी के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सैयद अली के अनुसार —
“बिच्छू का विष शरीर में जाने पर न्यूरोलॉजिकल सिस्टम पर सीधा असर डालता है। यह नशा शरीर के तापमान, हृदयगति और सांस की गति को अनियंत्रित कर देता है। कई बार इससे हृदय गति रुक जाती है।”
डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह के नशे का कोई “सुरक्षित स्तर” नहीं है। यह प्रयोग सीधा जानलेवा है और लंबे समय तक करने पर व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर स्थायी असर पड़ सकता है।
🔹 सरकार और समाज के लिए चुनौती
पाकिस्तान और अफगानिस्तान की स्थानीय प्रशासनिक एजेंसियों के लिए यह नई चुनौती बनकर सामने आई है। अभी तक इस प्रकार के नशे को लेकर न कोई कानूनी परिभाषा है और न ही रोकथाम के ठोस उपाय। पुनर्वास केंद्रों में इस तरह के नशे के शिकार लोगों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है, लेकिन चिकित्सा संस्थान अभी भी इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर शोध कर रहे हैं।
बिच्छू से बनने वाला यह नशा आज दक्षिण एशिया के कई इलाकों में गरीबी, अज्ञानता और निराशा का प्रतीक बनता जा रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर इसे समय रहते रोका नहीं गया तो यह सामाजिक और स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है।
यह अनोखी मगर जानलेवा प्रवृत्ति एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है — कि आखिर एक समाज को कितनी गहराई तक निराशा धकेल सकती है कि वह जहर को भी नशे में बदल ले?
— NGV PRAKASH NEWS




