सड़क सुरक्षा महज दिखावा: टूटी, गड्ढा युक्त सड़के तथा पटरियों पर कब्जा – बन रहे दुर्घटनाओं का कारण

⏩NGV PRAKASH NEWS की विशेष रिपोर्ट

बस्ती में सड़क सुरक्षा की बैठकें बनी दिखावा, जमीनी हकीकत शर्मनाक
– सड़कें गड्ढों से पटी, पटरियों पर कब्ज़ा, नियम कागज़ों में कैद

बस्ती, 25 अक्टूबर 2025

बस्ती जनपद में सड़क सुरक्षा की बैठकें अब महज औपचारिकता बनकर रह गई हैं। शासन स्तर पर बार-बार सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन जिले में इसका धरातल पर कोई असर नजर नहीं आ रहा है। सड़कों की हालत, अवैध कट, और पटरियों पर अतिक्रमण से हालात ऐसे बन गए हैं कि मानो सड़क सुरक्षा का कोई अस्तित्व ही न बचा हो।

हाईवे बना हादसों का हॉटस्पॉट
नेशनल हाईवे की स्थिति यह है कि जहां जिसे सुविधा हुई, वहीं अपने वाहन के लिए कट बना लिया। हाईवे पर बिना अनुमति के तैयार किए गए ये कट आए दिन सड़क हादसों की वजह बन रहे हैं। हालत यह है कि हाईवे पर जगह-जगह गड्ढे मुंह बाए खड़े हैं और किसी बड़े हादसे का इंतज़ार करते दिखाई देते हैं।

मरम्मत का खेल – गड्ढे भरे नहीं, ‘डामर पाउडर’ से लीपापोती
हाईवे अथॉरिटी और लोक निर्माण विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि सड़कों पर मरम्मत के नाम पर सिर्फ दिखावा किया जा रहा है। गड्ढों में थोड़ा डामर डालकर उसके ऊपर महीन मोरंग जैसा पाउडर छिड़क दिया जाता है। नतीजा — दो घंटे बाद वह फैल जाता है और सड़क पर गाड़ियां फिसलने लगती हैं। कई जगह तो ठेकेदार जानबूझकर कुछ हिस्से छोड़ देते हैं ताकि दोबारा काम का मौका बना रहे।

पटरियों पर कब्जा और खेती, नियमों की उड़ती धज्जियां
पीडब्ल्यूडी की सड़कों की पटरियों पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। कहीं दुकानें हैं, तो कहीं खेतों की बुवाई। सड़क सुरक्षा की बैठकों में जिन बातों पर चर्चा होती है, वे सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाती हैं — न पालन होता है, न जिम्मेदारी तय की जाती है।

शराब की दुकानों के पास सड़क पर ‘मंडी’
हालात इतने बिगड़ गए हैं कि जब से हाईवे और सड़कों पर शराब की दुकानें दोबारा खुली हैं, तब से उनके आसपास की पटरियों पर मुर्गा और मछली बेचने वालों ने कब्जा कर लिया है। पैदल चलने वालों के लिए जगह नहीं बची, जिससे हादसे का खतरा और बढ़ गया है।

कस्बों और बाजारों में अतिक्रमण का साम्राज्य
कस्बों और बाजारों में आधी सड़क पर ठेले और पटरी दुकानदारों का कब्जा है। वाहन चालकों को रोज जाम का सामना करना पड़ता है। वहीं, सड़क दुर्घटना संभावित स्थानों पर किसी भी प्रकार का संकेतक या चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगाया गया है।

सड़क सुरक्षा का सच — ‘कागजों में नियम, सड़क पर अराजकता’
जिले में हर महीने सड़क सुरक्षा की बैठकें होती हैं, लेकिन वहां लिए गए निर्णय न तो लागू होते हैं और न ही किसी अधिकारी को इसकी चिंता है। सड़कें खतरे से भरी हैं, वाहन चलाना चुनौती बन गया है, और आम जनता लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर चुका रही है।

बस्ती की जनता अब यही सवाल पूछ रही है —
“आखिर कब तक सड़क सुरक्षा बैठकों में सिर्फ फाइलें बोलेंगी, सड़कें नहीं?”


(NGV PRAKASH NEWS | बस्ती ब्यूरो रिपोर्ट)

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