“दहेज के लालच में टूटीं दो शादियां: मेरठ और सहारनपुर में बारातें लौटीं, खुशियों के घरों में छाया मातम”


मेरठ-सहारनपुर | 03 नवम्बर 2025 | NGV PRAKASH NEWS
उत्तर प्रदेश में दहेज की नई-नई मांगों ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। मेरठ और सहारनपुर से आई दो अलग-अलग घटनाओं ने समाज को झकझोर दिया, जहां दूल्हों ने शादी से ठीक पहले अतिरिक्त दहेज की मांग कर बारात ही नहीं निकाली। एक ने 20 लाख रुपये नकद मांगे तो दूसरे ने थार कार की फरमाइश रख दी। जब ये मांगें पूरी नहीं हुईं, तो दोनों जगहों पर सजाए गए मंडप सन्नाटे में बदल गए और दुल्हनों के सपने अधूरे रह गए।



दहेज की नई मांगों ने उजाड़ दीं दो बेटियों की खुशियां: मेरठ से सहारनपुर तक बारातें लौटीं, सपने अधूरे रह गए

NGV PRAKASH NEWS | 03 नवंबर 2025

दहेज की लानत एक बार फिर दो परिवारों की खुशियों को निगल गई। एक तरफ मेरठ में ₹20 लाख नकद की मांग ने मंडप को सन्नाटे में बदल दिया, तो दूसरी ओर सहारनपुर में “थार नहीं तो बारात नहीं” के फरमान ने हंसी-खुशी के माहौल को मातम में बदल दिया। दोनों घटनाएं समाज के उस कुरूप चेहरे को सामने लाती हैं, जहां बेटियों की खुशी अब भी सौदेबाजी के तराजू पर तोली जा रही है।


मेरठ में ₹20 लाख की मांग, बारात हाईवे पर ही रुक गई

मेरठ के दौराला थाना क्षेत्र में मास्टर महेश की बेटी की शादी परतापुर के अछरोड़ा निवासी सिपाही अभिषेक से तय हुई थी। दिल्ली-देहरादून हाईवे पर स्थित एक फार्महाउस में 2 नवंबर की रात बारात आने की तैयारी पूरी थी। सजे हुए मंडप, गूंजते ढोल-नगाड़े और मुस्कुराते चेहरे अचानक खामोश हो गए, जब खबर आई कि बारात नहीं आएगी।

दुल्हन के पिता की तहरीर के अनुसार, ₹20 लाख नकद दहेज की मांग पूरी न होने पर दूल्हे पक्ष ने शादी से इनकार कर दिया। रोका और सगाई में लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद जब फोन पर कहा गया — “पहले 20 लाख दो, तभी बारात चलेगी” — तो दुल्हन का सपना पलभर में बिखर गया।

पुलिस ने सिपाही अभिषेक और उसके परिजनों पर दहेज मांगने और शादी तोड़ने का मुकदमा दर्ज कर लिया है।


सहारनपुर में “थार नहीं तो बारात नहीं” का फरमान

उधर सहारनपुर के दौलतपुर गांव में भी लगभग वैसी ही त्रासदी घटी। यहां अजय कुमार की बहन की शादी बेहट थाना क्षेत्र के हिरा खेड़ी गांव निवासी अमनदीप से तय हुई थी। बुलेट मोटरसाइकिल और अन्य दहेज सामग्री तैयार थी, लेकिन शादी से ठीक पहले अमनदीप के चाचा सोनू ने फोन पर कहा — “अगर थार कार नहीं दोगे तो बारात नहीं आएगी।”

पहले तो परिवार को यह मजाक लगा, लेकिन जब बारात आने की खबर का इंतज़ार रात तक न पहुंचा, तो सब कुछ साफ हो गया। सजी हुई दुल्हन का चेहरा सूने आंगन में जैसे ठिठक गया। मेंहदी सूख चुकी थी, लेकिन उसका रंग अब प्रतीक्षा और पीड़ा का प्रतीक बन गया था।

चिलकाना थाने में दूल्हे और उसके परिजनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस ने कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।


समाज को झकझोर देने वाली तस्वीरें

दोनों घटनाओं में एक समानता है — लालच ने रिश्तों को निगल लिया। जहां एक पिता ने अपनी बेटी की शादी के लिए सालों की जमा पूंजी लगा दी, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों ने इंसानियत और मानवीय भावनाओं को दहेज के सिक्कों में तौल दिया।

गांव के लोग कह रहे हैं, यह सिर्फ दो परिवारों की नहीं, पूरे समाज की हार है। आज भी जब बेटी की शादी की बात आती है, तो सबसे पहले सवाल उठता है — “क्या दोगे?” न कि “क्या सोचते हो?”


दहेज प्रथा पर सवाल, कानून के बावजूद जारी बेशर्मी

दहेज निषेध अधिनियम 1961 के बावजूद समाज में दहेज की प्रथा गहराई तक फैली है। कानून है, लेकिन सामाजिक दबाव उससे बड़ा है।
हर साल ऐसे सैकड़ों मामले सामने आते हैं जहां दुल्हनें या उनके परिवार दहेज की मांग पूरी न करने पर उत्पीड़न, हिंसा या शादी टूटने का शिकार बनते हैं।

सवाल यही है — कब तक बेटियों की कीमत लगती रहेगी? कब तक एक पिता अपनी औकात से बढ़कर समाज के इस दिखावे का शिकार बनेगा?


NGV PRAKASH NEWS की राय

NGV PRAKASH NEWS का मानना है कि यह सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि सामाजिक सोच का भी मुद्दा है। जब तक हर परिवार यह ठान नहीं लेता कि “हम दहेज नहीं देंगे, न लेंगे”, तब तक बेटियों के सपनों की कीमत लगती रहेगी।
जरूरत है सामूहिक चेतना की — जहां रिश्ते रुपये से नहीं, भरोसे से तय हों।


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