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सोनभद्र में आदिवासी महिलाओं को निशाना बनाकर जमीन हड़पने का आरोप, धर्म परिवर्तन के दबाव का मामला, कई नामजद पर मुकदमे दर्ज
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की दुद्धी तहसील में आदिवासी समाज की पुश्तैनी जमीनों पर कथित रूप से अवैध कब्जे का गंभीर मामला सामने आया है।
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि एक समुदाय विशेष से जुड़े कुछ लोग अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को प्रेम संबंधों और विवाह के जरिए अपने जाल में फंसाते हैं। इसके बाद उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जाता है और उनकी जमीनों पर अधिकार जमा लिया जाता है। इस पूरे मामले को लेकर पीड़ितों ने मुख्यमंत्री से शिकायत करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह क्षेत्र झारखंड और मध्य प्रदेश की सीमा से सटा हुआ है, जहां अनुसूचित जनजाति की आबादी लगभग 50 प्रतिशत बताई जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सीमावर्ती इलाके में लंबे समय से आदिवासी महिलाओं को निशाना बनाकर विवाह के माध्यम से जमीन का हस्तांतरण कराया जा रहा है। इससे न केवल आदिवासी समाज की जमीनें खतरे में हैं, बल्कि सामाजिक और जनसांख्यिकीय संतुलन बिगड़ने की आशंका भी गहराती जा रही है। आदिवासी समुदाय में इसको लेकर असुरक्षा और आक्रोश का माहौल देखा जा रहा है।
नामजद आरोपियों पर दर्ज हुए मुकदमे
दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के बघाडू गांव के बहादुर अली, नसीम उद्दीन, अजमत अली, रजिया पनिका और अमवार गांव के अब्दुल सुभान सहित कुछ अन्य लोगों के खिलाफ धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने, अनुसूचित जाति-जनजाति उत्पीड़न और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि नामजद आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामलों की गहन जांच की जा रही है और दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल हो रही है।
पीड़ित परिवारों की आपबीती
प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़ित लोगों ने आरोप लगाया कि उनकी बेटियों पर विवाह और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जा रहा है।
पुलिस को दिए गए तहरीर में बताया कि उन्हें प्रलोभन देने के साथ-साथ धमकियां भी दी जाती हैं । पढ़ाई के लिए स्कूलआते-जाते समय छेड़छाड़ की घटनाओं का भी जिक्र किया गया है। वहीं पीड़ितों का यह भी कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए नाम और पहचान का दुरुपयोग किया गया।
मिली जानकारी के अनुसार एक मामले में यह भी आरोप सामने आया है कि विवाह के बाद नाम परिवर्तन कर अनुसूचित जनजाति का दर्जा दर्शाते हुए जमीनों की खरीद-फरोख्त की गई और परिवार रजिस्टर में कथित तौर पर हेरफेर की गई। इस पर संज्ञान लेते हुए एसडीएम द्वारा अब जमीन से जुड़े मामलों में नोटिस जारी कर जांच शुरू कर दी गई है।
तहसील प्रशासन और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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