फास्ट फूड खाने की लत नें ले ली छात्रा की जान..

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फास्ट फूड की लत, एक घर की दुनिया उजड़ गई: अमरोहा की अहाना की मौत ने उठाए गंभीर सवाल

अमरोहा 23 दिसम्बर 25.

अमरोहा की 16 वर्षीय छात्रा अहाना की मौत सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि बदलती खानपान संस्कृति पर एक कठोर चेतावनी भी है। चाऊमीन, मैगी, पिज्जा और बर्गर जैसे फास्ट फूड, जो आज किशोरों की रोजमर्रा की जरुरत बन चुके हैं, यह किस हद तक शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचा रहे हैं—यह मामला उसी का भयावह उदाहरण बनकर सामने आया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अहाना को फास्ट फूड का खास शौक था। मना करने के बाद भी वह अक्सर फास्ट फूड खाती रहती थी।

उसे सितंबर में पेट दर्द की शिकायत शुरू हुई, जिसे शुरुआत में सामान्य दर्द माना गया। लेकिन 30 नवंबर को जब बहुत तेज दर्द होने लगा तो उसे मुरादाबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

जब जांच हुई तो सामने आया कि उसकी आंतें चिपक चुकी थीं और उनमें छेद हो गए थे | यह एक ऐसी स्थिति है जो आमतौर पर लंबे समय तक गलत खानपान से जुड़ी मानी जाती है।

डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया और स्थिति सामान्य हुई। दस दिन बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया , लेकिन शरीर अंदर से कमजोर हो चुका था।

लगातार कमजोरी बढ़ती गई और चार दिन पहले अचानक तबीयत फिर खराब हो गई | इस बार परिजन उसे दिल्ली एम्स ले गए । डॉक्टर द्वारा चिकित्सा प्रारंभ किया गया | शुरुआत में सुधार के बाद रविवार रात दिल ने साथ छोड़ दिया और अहाना की मौत हार्ट फेल होने से हो गई।

यह सवाल अब सिर्फ एक परिवार का नहीं है कि आखिर इतनी कम उम्र में आंतें क्यों फेल हो गईं।

विशेषज्ञों के अनुसार लगातार फास्ट और प्रोसेस्ड फूड लेने से आंतों की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। मैदा, खराब तेल, अत्यधिक नमक और मसालों से बनी चीजें पाचन तंत्र पर सीधा हमला करती हैं। फाइबर की कमी से आंतें कमजोर पड़ती हैं और सूजन, अल्सर, यहां तक कि छेद जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार स्ट्रीट वैन पर मिलने वाले फास्ट फूड में न तो साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है और न ही गुणवत्तापूर्ण तेल व सामग्री का। किशोरों में मोटापा, फैटी लिवर, टाइप-2 डायबिटीज और हार्ट से जुड़ी समस्याएं अब पहले से कहीं कम उम्र में दिखने लगी हैं। अहाना का मामला इसी खतरनाक ट्रेंड की ओर इशारा करता है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि स्कूल-कॉलेज के छात्रों में फास्ट फूड को ‘नॉर्मल’ डाइट मान लिया गया है। भागदौड़ भरी जिंदगी में दाल, रोटी और सब्जी पीछे छूटती जा रही है। बच्चों की पसंद और बाजार की आसान उपलब्धता के चलते अभिभावक भी कई बार सख्ती नहीं कर पाते। लेकिन अहाना की मौत यह सवाल छोड़ गई है कि क्या स्वाद के आगे सेहत की कीमत इतनी सस्ती हो गई है?

डॉक्टरों का साफ कहना है कि अगर भोजन की जगह लगातार फास्ट फूड लिया जाए, तो यह धीरे-धीरे शरीर को भीतर से खोखला कर देता है। शुरुआत पेट दर्द से होती है, फिर लिवर, दिल और आंतें चपेट में आती हैं। एक समय के बाद स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।

अहाना अब नहीं रही, लेकिन उसकी कहानी उन हजारों किशोरों और उनके माता-पिता के लिए चेतावनी है, जो रोज जंक फूड को मामूली चीज समझकर नजरअंदाज कर रहे हैं। सवाल यह नहीं है कि फास्ट फूड कितना स्वादिष्ट है, सवाल यह है कि उसकी कीमत कौन और कब चुका रहा है।

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