⏩85% लोगों ने EVM को सही कहा…

राहुल के ईवीएम विरोध पर कर्नाटक सरकार का ही सर्वे बना आईना, 83 फीसदी जनता ने जताया भरोसा
ईवीएम को लेकर लगातार सवाल उठा रहे कांग्रेस नेता राहुल गांधी की राजनीति पर अब उनकी ही पार्टी की सरकार के आंकड़े भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार द्वारा कराए गए एक आधिकारिक सर्वे में यह सामने आया है कि राज्य के नागरिकों का बड़ा बहुमत न सिर्फ चुनावी प्रक्रिया को स्वतंत्र और निष्पक्ष मानता है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम पर उनका भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक यह सर्वे मुख्य चुनाव अधिकारी वी. अंबुकुमार के निर्देश पर कराया गया था, जिसे कर्नाटक निगरानी और मूल्यांकन प्राधिकरण ने योजना, कार्यक्रम निगरानी और सांख्यिकी विभाग के तहत प्रकाशित किया। इस सर्वे में बेंगलुरु, बेलगावी, कालाबुरागी और मैसूरु प्रशासनिक डिवीजनों के 102 विधानसभा क्षेत्रों से 5100 नागरिकों को शामिल किया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार 84.55 प्रतिशत लोगों का मानना है कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कराए जाते हैं, जबकि 83.61 प्रतिशत नागरिकों ने ईवीएम को भरोसेमंद बताया है। यह आंकड़ा 2023 के 77.9 प्रतिशत के मुकाबले साफ तौर पर बढ़ा हुआ है, जिससे यह संकेत मिलता है कि समय के साथ ईवीएम पर जनता का विश्वास मजबूत हुआ है। क्षेत्रवार देखें तो कालाबुरागी डिवीजन में भरोसा सबसे अधिक रहा, जहां 83.24 प्रतिशत लोग सहमत और 11.24 प्रतिशत पूरी तरह सहमत थे कि ईवीएम विश्वसनीय हैं। वहीं मैसूरु डिवीजन में 70.67 प्रतिशत लोग सहमत और 17.92 प्रतिशत पूरी तरह सहमत पाए गए।
इन आंकड़ों ने राहुल गांधी के उस अभियान को सीधा चुनौती दी है, जिसमें उन्होंने ईवीएम से वोट चोरी का आरोप लगाते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की थी। दिलचस्प बात यह है कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने स्थानीय निकाय चुनावों के लिए बैलेट पेपर पर लौटने का फैसला ईवीएम पर कथित अविश्वास का हवाला देते हुए किया था, जबकि उसी सरकार के सर्वे में जनता का भरोसा स्पष्ट रूप से ईवीएम के पक्ष में दिख रहा है।
इस विरोधाभास को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कर्नाटक सरकार का सर्वे राहुल गांधी के दावों पर करारा तमाचा है और यह साबित करता है कि समस्या आंकड़ों में नहीं, बल्कि चुनावी हार स्वीकार न करने की मानसिकता में है। उनका कहना है कि जब कांग्रेस जीतती है तो चुनाव आयोग और व्यवस्था पर कोई सवाल नहीं उठते, लेकिन हारते ही आरोपों का सिलसिला शुरू हो जाता है।
पूनावाला ने यह भी कहा कि उमर अब्दुल्ला और सुप्रिया सुले जैसे इंडिया ब्लॉक के कुछ नेता भी राहुल गांधी के ईवीएम विरोध से खुद को अलग कर चुके हैं और अब कर्नाटक सरकार के सर्वे ने उनके दावों को सार्वजनिक रूप से कमजोर कर दिया है। भाजपा का आरोप है कि बैलेट पेपर की मांग दरअसल उस दौर में लौटने की कोशिश है, जब बूथ कैप्चरिंग और धांधली आम बात हुआ करती थी।
कुल मिलाकर कर्नाटक सरकार के अपने ही सर्वे ने राहुल गांधी की ईवीएम विरोधी राजनीति को कटघरे में खड़ा कर दिया है और यह सवाल छोड़ दिया है कि जब जनता का भरोसा मशीनों पर बढ़ रहा है, तब उनके खिलाफ माहौल बनाने की जरूरत आखिर किसे और क्यों महसूस हो रही है।
NGV PRAKASH NEWS
