कोरोना से भी खतरनाक है यह बीमारी-हर साल इतने लाख लोग मौत के मुंह में समा जाते हैं…….

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दवा-प्रतिरोधी फंगस कैंडिडा ऑरिस वैश्विक स्वास्थ्य संकट के रूप में उभरा

नई दिल्ली, 14 जनवरी 2026 —
दवा-प्रतिरोधी फंगस कैंडिडा ऑरिस तेजी से एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। एंटीफंगल इलाज उपलब्ध होने के बावजूद इसकी मृत्यु दर बेहद ऊंची बनी हुई है और हर साल लाखों लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं, खासकर अस्पतालों और आईसीयू में भर्ती मरीज। जापान में पहली बार पहचाने जाने के करीब डेढ़ दशक बाद यह फंगस अब दुनियाभर के अस्पतालों के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।

भारतीय वैज्ञानिकों के नेतृत्व में हुए एक नए अध्ययन में स्पष्ट किया गया है कि कैंडिडा ऑरिस न केवल तेजी से फैल रहा है, बल्कि समय के साथ अधिक खतरनाक भी होता जा रहा है। जलवायु परिवर्तन, सीमित एंटीफंगल विकल्प और पहचान की कठिनाइयों के बीच यह संक्रमण वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों की तैयारियों की परीक्षा ले रहा है। यह फंगस इंसानी त्वचा पर आसानी से बस जाता है और अस्पतालों के वातावरण में लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता रखता है। इसकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह कई एंटीफंगल दवाओं को बेअसर कर देता है, जिससे इलाज जटिल और देर से प्रभावी होता है।

अध्ययन के अनुसार आक्रामक फंगल संक्रमण विश्व स्तर पर तेजी से बढ़ रहे हैं और हर साल लगभग 65 लाख लोग गंभीर संक्रमण की चपेट में आते हैं। एंटीफंगल इलाज उपलब्ध होने के बावजूद कैंडिडा ऑरिस जैसे संक्रमणों में मृत्यु दर कई मामलों में 50 प्रतिशत से अधिक पाई गई है।

यह शोध वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्फेक्शस डिजीज और हैकनसैक मेरिडियन सेंटर फॉर डिस्कवरी एंड इनोवेशन के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है और इसके नतीजे जर्नल माइक्रोबायोलॉजी एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी रिव्युज में प्रकाशित हुए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि गर्म और आर्द्र मौसम कैंडिडा ऑरिस जैसे फंगस के उभरने और तेजी से फैलने के लिए अनुकूल होता है और जलवायु परिस्थितियों में बदलाव से भविष्य में ऐसे संक्रमणों का खतरा और बढ़ सकता है।

शोध में बताया गया है कि इस फंगस की कोशिका-दीवार की अनोखी संरचना इसे खास बनाती है। शर्करा से भरपूर यह दीवार दवाओं से बचाव करती है और इंसानी कोशिकाओं से मजबूती से चिपकने में मदद करती है। यह फंगस अपनी बनावट बदल सकता है, खमीर जैसी अवस्था से धागेनुमा रूप में फैल सकता है और अपने जीन की अभिव्यक्ति को पर्यावरण के अनुसार ढाल सकता है, जिससे यह प्रतिरक्षा प्रणाली से भी बच निकलने में सक्षम हो जाता है।

कैंडिडा ऑरिस प्लास्टिक, धातु और अन्य निर्जीव सतहों पर भी लंबे समय तक जीवित रह सकता है, इसी कारण यह अस्पतालों और आईसीयू में तेजी से फैलता है। कई बार पारंपरिक सफाई उपाय भी इसे पूरी तरह खत्म नहीं कर पाते, जिससे संक्रमण का खतरा बना रहता है।

वर्तमान में फंगल संक्रमण के इलाज के लिए एंटीफंगल दवाओं के चार वर्ग उपलब्ध हैं, जिन्हें बीसवीं सदी के दूसरे हिस्से में विकसित किया गया था, लेकिन कैंडिडा ऑरिस कई मामलों में इनसे भी बच निकलता है। हालांकि तीन नई दवाएं परीक्षण के चरण में हैं या हाल ही में मंजूरी पा चुकी हैं, जिनसे भविष्य में इलाज के विकल्प बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

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