सच दिखाने पर बहा पत्रकार का खून-क्या अब बंदूक से तय होगी कानून का सीमा…….

छत्तीसगढ़ से मेघा तिवारी की विशेष रिपोर्ट -NGV PRAKASH NEWS


सच दिखाने पर पत्रकार का लहू बहाया गया, क्या अब ‘बंदूक’ तय करेगी कानून की सीमा?

अमरकंटक–मैकल क्षेत्र, 15 जनवरी 2026 —
छत्तीसगढ़–मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित अमरकंटक–मैकल बायोस्फियर रिजर्व अवैध खनन का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। इसी सिलसिले में अवैध उत्खनन की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार सुशांत गौतम पर 8 जनवरी की शाम जानलेवा हमला किया गया। हमले में उन्हें लोहे की रॉड से पीटा गया, वाहन क्षतिग्रस्त किए गए और रिपोर्टिंग से जुड़े मोबाइल फोन भी छीन लिए गए।

घटना धनौली क्षेत्र में शाम लगभग छह बजे की है, जब सुशांत गौतम अपनी टीम के साथ मैकल पर्वत श्रृंखला में चल रहे अवैध उत्खनन के दृश्य रिकॉर्ड कर लौट रहे थे। इसी दौरान तीन वाहनों में सवार हमलावरों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया — सामने से सफेद कार, एक ओर हाईवा और पीछे से तीसरी गाड़ी लगाकर रास्ता रोक दिया गया। इसके बाद लोहे की रॉड से हमला किया गया, गाड़ियों के शीशे तोड़े गए और मोबाइल फोन लूट लिए गए।

इस मामले में एफआईआर संख्या 0014/2026 दर्ज की गई है। आरोपियों के रूप में जयप्रकाश शिवदासानी उर्फ जेठू, सुधीर बाली और लल्लन तिवारी के नाम सामने आए हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धाराएँ 126(2), 296, 115(2), 351(3), 324(4), 304 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। मामला संगठित और पूर्व नियोजित अपराध की श्रेणी में माना जा रहा है।

मरवाही वनमंडल की रिपोर्ट में पहले ही पमरा क्षेत्र में क्रेशर संचालन को नियम विरुद्ध बताया गया था। रिपोर्ट के अनुसार बायोस्फियर रिजर्व क्षेत्र में 250 मीटर की अनिवार्य दूरी का उल्लंघन करते हुए भारी मशीनें लगाई गईं, विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल किया गया और पहाड़ों को बड़े पैमाने पर क्षति पहुंचाई गई। इसके बावजूद खनन गतिविधियाँ जारी रहीं।

वरिष्ठ पत्रकार कुमार जितेंद्र ने इस घटना पर सवाल उठाते हुए कहा कि पत्रकारों पर लगातार हमले लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा हैं और यह सीधे जनता के सूचना के अधिकार पर हमला है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो यह माफिया के मनोबल को और बढ़ाएगा।

हमले के बाद सुशांत गौतम ने कहा कि वह दबाव और धमकियों से पीछे हटने वाले नहीं हैं और मैकल क्षेत्र में हो रहे अवैध उत्खनन से जुड़ी रिपोर्टिंग जारी रहेगी। उनका कहना है कि यह हमला सच को दबाने का प्रयास है।

मैकल पर्वत श्रृंखला नर्मदा, सोन और जोहिला जैसी नदियों की उद्गम स्थली है और इसे पारिस्थितिक रूप से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में अवैध खनन से केवल पर्यावरणीय नुकसान ही नहीं हो रहा बल्कि भूजल, नदी तंत्र और स्थानीय जीवन प्रणाली पर भी दीर्घकालिक प्रभाव पड़ रहा है।

प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि वन विभाग की चेतावनियों के बावजूद खनिज विभाग द्वारा समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। फिलहाल पूरे मामले में जांच जारी है और पत्रकार संगठनों ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी तथा पत्रकारों की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की मांग की है।

NGV PRAKASH NEWS


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