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कपसाड़ कांड: हत्या और अपहरण मामले में नया मोड़, आरोपी की उम्र को लेकर कानूनी लड़ाई तेज
मेरठ (सरधना), 15 जनवरी 2026 —
सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में दलित महिला सुनीता की हत्या और उसकी बेटी रूबी के अपहरण के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। जहां एक ओर पीड़ित परिवार और विभिन्न राजनीतिक दल न्याय की मांग को लेकर अड़े हैं, वहीं दूसरी ओर आरोपी पारस राजपूत की उम्र को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है, जिससे पूरे मामले की कानूनी दिशा बदलती नजर आ रही है।
घटना के बाद जब मीडिया टीम आरोपी के घर पहुंची तो वहां ताले लटके मिले और पूरा परिवार फरार पाया गया। इसी दौरान आरोपी के कुछ पड़ोसियों ने दावा किया कि पारस और रूबी के बीच पहले से प्रेम संबंध था और इसको लेकर गांव में पंचायत भी हो चुकी थी। पड़ोसियों का यह भी कहना है कि विवाद के समय लड़के पक्ष ने लड़की के परिवार को समझौते के तहत 50 हजार रुपये दिए थे। हालांकि इन दावों की पुलिस ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
एक पड़ोसी ने यह सनसनीखेज दावा भी किया कि महिला की हत्या पारस ने नहीं बल्कि खुद उसकी बेटी ने की थी, जब मां ने उसे लड़के के साथ जाने से रोकने की कोशिश की। पुलिस इस दावे को फिलहाल अपुष्ट मानते हुए जांच के दायरे में रखे हुए है।
घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है और पुलिस ने पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया है। बैरिकेडिंग कर गांव को सील कर दिया गया है। सपा विधायक अतुल प्रधान सहित कई नेता गांव के बाहर धरने पर बैठे हैं और पीड़ित परिवार के लिए 50 लाख रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग कर रहे हैं।
पुलिस के अनुसार 8 जनवरी की सुबह सुनीता अपनी बेटी के साथ खेत की ओर जा रही थी, तभी गांव का ही रहने वाला पारस अपने साथियों के साथ पहुंचा और हथियारों के बल पर रूबी का अपहरण कर लिया। जब सुनीता ने विरोध किया तो उस पर धारदार हथियार से हमला किया गया, जिससे उसकी गंभीर हालत में मौत हो गई।
लगातार तलाश के बाद पुलिस की 10 टीमों और लगभग 200 कर्मियों ने शनिवार को आरोपी को हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया और युवती को बरामद कर लिया गया। युवती को काउंसलिंग के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है, जबकि आरोपी को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
अब आरोपी के नाबालिग होने का दावा सामने आया है। शैक्षिक दस्तावेजों के आधार पर उसकी उम्र 17 वर्ष 6 माह बताई जा रही है। आरोपी के वकील बलराम सोम ने कहा है कि चूंकि आरोपी अभी 18 वर्ष का नहीं हुआ है, इसलिए वह किशोर की श्रेणी में आता है और केस को किशोर न्याय बोर्ड में ट्रांसफर कराने के लिए याचिका दाखिल की जाएगी। इसी आधार पर जमानत की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
फिलहाल पुलिस और अदालत की नजर आरोपी की वास्तविक उम्र के सत्यापन और कानूनी प्रक्रिया पर टिकी है, जबकि पीड़ित परिवार अपनी बेटी की सुरक्षा और न्याय की मांग पर अड़ा हुआ है।
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