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कोहरे की सफेद चादर में छुपा खतरा: सर्दियों की सुबह ड्राइविंग क्यों बन जाती है मौत का खेल
सर्दियों की सुबह है। सड़क पर कोहरे की दूधिया चादर इस कदर बिछी है कि कुछ कदम आगे का दृश्य भी साफ नजर नहीं आ रहा। ऐसे हालात में वाहन चलाना वैसा ही है, जैसे आंखों पर पट्टी बांधकर तीर चलाना— अब तीर निशाने पर लगेगा या नहीं, यह पूरी तरह किस्मत पर निर्भर है।
यहां सबसे खास बात यह है कि जरूरी नहीं किस्मत हर बार साथ दे | इस दिनों जबकि उत्तर भारत घने कोहरे और स्मॉग की चपेट में है और गांव के संपर्क मार्ग से लेकर हाईवे,एक्सप्रेसवे तक हर तरफ धुंध का ऐसा जाल फैला है, जिसके उस पार केवल खतरा नजर आता है।
⏩ अब अगर हमको इस कोहरे में गाड़ी चलाना पड़े, तो सबसे जरूरी है कि हम कुछ सावधानियों का पालन कर अपनी यात्रा को सुगम और सुरक्षित बना सकते हैं|
👉बीते दिनों देश के अलग-अलग हिस्सों में एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण सड़क हादसों ने यह साफ कर दिया है कि कोहरे में ड्राइविंग कोई बहादुरी नहीं, बल्कि समझदारी और संयम की सबसे बड़ी परीक्षा है। देखा गया है कि अधिकांश मामलों में तेज रफ्तार, गलत हेडलाइट का इस्तेमाल और पर्याप्त दूरी न रखने की वजह से एक के बाद एक वाहन टकराते चले गए और चंद सेकेंड में जिंदगियां तबाह हो गईं।
⏩विशेषज्ञों की मानें तो कोहरे के मौसम में सबसे सुरक्षित विकल्प यही है कि निजी वाहन से लंबी दूरी की यात्रा टाल दी जाए। लेकिन यदि मजबूरी में सफर करना ही पड़े, तो कुछ जरूरी सावधानियों का पालन करना बेहद जरूरी हो जाता है।
⏩कोहरे में ड्राइविंग की सबसे बड़ी चुनौती होती है वह है देखने की क्षमता। आमतौर पर लोग यह सोचकर हाई बीम हेडलाइट जला लेते हैं कि तेज रोशनी से रास्ता साफ दिखाई देगा, जबकि हकीकत इसके ठीक विपरीत होती है। हाई बीम की तेज रोशनी कोहरे में मौजूद पानी की महीन बूंदों से टकराकर वापस आंखों पर लौटती है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में बैकस्कैटर कहा जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि सामने एक सफेद दीवार जैसी आकृति बन जाती है और दृश्यता और भी धुंधला हो जाता है।
⏩ कोहरे में फॉग लाइट या लो बीम हेडलाइट सबसे ज्यादा कारगर होती है। फॉग लाइट सड़क के नजदीक और चौड़े एंगल में रोशनी डालती है, जिससे सड़क की सतह, लेन मार्किंग और किनारे का अंदाजा अच्छी तरह से होता है। लो बीम हेडलाइट भी रोशनी को नीचे की ओर रखती है, जिससे कोहरे में रिफ्लेक्शन कम होता है। यदि वाहन में पीली फॉग लाइट लगी हो तो यह और भी फायदेमंद मानी जाती है, क्योंकि पीली रोशनी आंखों पर कम जोर डालती है और कोहरे में बेहतर दृश्य देती है।
⏩ कोहरे के दौरान लाइट का सही चयन बहुत उपयुक्त होता है | विशेषज्ञों के अनुसार दौरान पीली लाइट को सफेद या नीली लाइट से अधिक उपयुक्त माना जाता है। पीली रोशनी का वेवलेंथ ज्यादा होता है, जिससे वह कोहरे की महीन जलकणों से टकराकर कम बिखरती है। इसके विपरीत, सफेद या नीली रोशनी का वेवलेंथ छोटा होता है, जो कोहरे में ज्यादा फैलती है और ड्राइवर की आंखों में चकाचौंध पैदा करती है। ऑटोमोबाइल सेफ्टी से जुड़ी रिपोर्ट बताती हैं कि घने कोहरे में सफेद हाई बीम लाइट से विजिबिलिटी 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो सकती है।
⏩ कोहरे की वजह से विजिबिलिटी कितनी तेजी से घटती है, इसे आंकड़ों से समझना जरूरी है। साफ मौसम में एक ड्राइवर को औसतन 200 से 300 मीटर तक का रास्ता साफ दिखाई देता है। हल्के कोहरे में यही दूरी घटकर 50 से 100 मीटर रह जाती है। जबकि घने कोहरे में कई बार विजिबिलिटी सिर्फ 10 से 20 मीटर या इससे भी कम पर सिमट जाती है। इसका मतलब यह है कि 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही गाड़ी को रुकने के लिए जितनी दूरी चाहिए, उतनी दूरी ड्राइवर को दिखाई ही नहीं देती। यही कारण है कि कोहरे में स्पीड कंट्रोल सबसे बड़ा सुरक्षा नियम बन जाता है।
⏩तेज रफ्तार कोहरे में सबसे बड़ा दुश्मन साबित होती है। क्यों की कम विजिबिलिटी के कारण सामने खड़ा वाहन, अचानक मुड़ता वाहन, सड़क को पार करता कोई जानवर या आदमी या सड़क पर बैठा कोई जानवर देर से नजर आता है और ब्रेक लगाने का मौका ही नहीं मिल पाता। इसलिए कोहरे में हमेशा स्पीड आम दिनों की अपेक्षा कम रखना चाहिए | स्पीड इतनी हो की जरूरत पड़ने पर गाड़ी को सुरक्षित रूप से रोका जा सके।
⏩इसके साथ ही टेलगेटिंग यानी आगे चल रही गाड़ी के बेहद करीब चलना भी बेहद खतरनाक है। कई बार ड्राइवर आगे वाले वाहन की टेललाइट देखकर उसके बिल्कुल पीछे चलने लगते हैं । लेकिन यह कुछ समय खतरनाक साबित हो जाता है जब आगे वाली गाड़ी अचानक ब्रेक लगा दे, तो टक्कर तय है। कोहरे में वाहन से वाहन के बीच की सुरक्षित दूरी सामान्य दिनों की तुलना में कहीं ज्यादा रखनी चाहिए, ताकि किसी भी इमरजेंसी में सुरक्षित ब्रेकिंग की जा सके।
⏩कुल मिलाकर, कोहरे में ड्राइविंग एक छोटी सी लापरवाही को बड़ा हादसा बना सकती है। सही हेडलाइट, नियंत्रित गति और सुरक्षित दूरी—ये तीन नियम अगर सख्ती से अपनाए जाएं, तो सर्दियों की सफेद चादर के बीच भी सफर कुछ हद तक सुरक्षित बनाया जा सकता है।
👉 यहां पर विशेष ध्यान देने वाली बात यह है कि बहुत इमरजेंसी ना हो तो रात 2:00 बजे से सुबह 7:00 बजे तक सड़क पर ना निकले |
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