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लंबे अंतरंग संबंध और संतान होने पर घरेलू हिंसा कानून लागू हो सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट
मुंबई, 24 जनवरी 2026.
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने घरेलू हिंसा अधिनियम से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि लंबे समय तक चला अंतरंग संबंध, बार-बार साथ रहना और उससे संतान का जन्म होना केवल कैजुअल रिलेशनशिप नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसे संबंध परिस्थितियों के आधार पर घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शादी जैसे रिश्ते की श्रेणी में आ सकते हैं।
यह फैसला न्यायमूर्ति एम.एम. नेरलिकर की पीठ ने गडचिरोली जिले के एक किसान द्वारा दायर याचिका पर सुनाया। याचिकाकर्ता ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत उसके खिलाफ चल रही कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। उस पर उसकी 22 वर्षीय साथी ने घरेलू हिंसा के आरोप लगाए थे। हालांकि, कोर्ट ने आरोपी के माता-पिता और पत्नी को राहत देते हुए उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही को रद्द कर दिया।
मामले के अनुसार, महिला और उसकी नाबालिग बेटी ने मजिस्ट्रेट अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी के साथ उसका लंबे समय तक संबंध रहा। महिला का दावा था कि वह आरोपी के साथ रहती थी और इसी दौरान वह गर्भवती हुई। आरोप है कि आरोपी के दबाव में पहले गर्भपात कराया गया, इसके बाद भी दोनों के बीच संबंध बना रहा और बाद में एक बच्ची का जन्म हुआ, जो वर्तमान में लगभग आठ महीने की है।
महिला का यह भी आरोप है कि आरोपी ने उससे शादी करने से इनकार करते हुए वर्ष 2022 में किसी अन्य महिला से विवाह कर लिया। इसके बाद महिला ने आरोपी के खिलाफ बलात्कार सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया।
अदालत में आरोपी की ओर से यह दलील दी गई कि दोनों के बीच केवल एक सामान्य संबंध था, जिसे घरेलू रिश्ता नहीं माना जा सकता। इस पर कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि रिश्ते की अवधि, शारीरिक संबंध और संतान का होना शादी जैसे रिश्ते के मजबूत संकेत हैं। ऐसे में प्रारंभिक स्तर पर घरेलू हिंसा का मामला खारिज नहीं किया जा सकता।
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