अब ठाकुर चौबीसी ने सरकार को दिया ये अल्टीमेटम…….

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यूजीसी के नए नियमों के विरोध में ठाकुर चौबीसी में भड़का आक्रोश, भाजपा सरकार के खिलाफ खुला मोर्चा

मेरठ, 27 जनवरी 2026.
यूजीसी के नए नियमों को लेकर देशभर में उठ रहे विरोध के बीच पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद स्थित ठाकुर चौबीसी क्षेत्र से भाजपा सरकार के लिए गंभीर राजनीतिक संकेत सामने आए हैं। राजपूत समाज के गढ़ माने जाने वाले इस इलाके में यूजीसी के नए कानूनों के खिलाफ खुला विरोध शुरू हो गया है। गांव-गांव में बैठकों और चर्चाओं के दौरान भाजपा सरकार के प्रति नाराजगी साफ दिखाई दे रही है।

क्या बताते चलें कि यूजीसी के नियम 2026 को लेकर सवर्ण समाज में काफी विरोध हो रहा है और इसको लेकर अब सरकार भी बैक फुट पर नजर आ रही है | वहीं विपक्ष भी इसे सरकार के खिलाफ एक हथियार मानकर अंदर खाने इस आंदोलन को और फैलने के लिए हवा भी दे रही है |

स्थानीय स्तर पर मीडिया से बातचीत में ठाकुर समाज के लोगों ने इन नियमों को सामान्य वर्ग विरोधी बताते हुए सरकार पर तीखे आरोप लगाए। राजपूत समाज के मेरठ अध्यक्ष अनूप राघव ने कहा कि यूजीसी के नए नियम “काले कानून” हैं, जिनका उद्देश्य सामान्य जाति के छात्रों को उच्च शिक्षा से वंचित करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में फर्जी शिकायतों के आधार पर सामान्य वर्ग के छात्रों को निशाना बनाया जा सकता है, जिससे उन्हें अपराधी की तरह ट्रीट किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ये नियम समाज को बांटने और जातियों के बीच तनाव पैदा करने वाले हैं तथा सरकार को इन्हें तुरंत वापस लेना चाहिए।

अनूप राघव ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने इन नियमों को वापस नहीं लिया, तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करीब 650 ठाकुर गांव सड़कों पर उतरेंगे और बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। उन्होंने इसे शिक्षा के अधिकार पर सीधा हमला बताया।

विरोध को और तेज करते हुए ठाकुर समाज के अभिषेक सोम ने कहा कि जल्द ही एक बड़ी महापंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि आगामी चुनावों में सरकार को जवाब देने का मन बना लिया गया है। उन्होंने अपने ही समाज के सांसदों और विधायकों के खिलाफ भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अब केवल चेतावनी नहीं, बल्कि निर्णायक कदम उठाए जाएंगे।

वहीं संजय सिंह सोम ने कहा कि हालिया चुनावी अनुभव यह दिखाता है कि सामान्य वर्ग की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने दावा किया कि यदि सामान्य वर्ग संगठित होकर सामने आया, तो भाजपा की सत्ता को खत्म किया जा सकता है। उनका कहना था कि सरकार को सत्ता में बने रहने का भ्रम नहीं पालना चाहिए, क्योंकि जमीनी स्तर पर असंतोष तेजी से बढ़ रहा है।

ठाकुर समाज के अन्य लोगों ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर सामान्य वर्ग की अनदेखी का आरोप लगाया। उनका कहना है कि यूजीसी के नए नियम छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं और अब भाजपा सरकार को समर्थन देने का उन्हें पछतावा हो रहा है।

यूजीसी नियमों को लेकर ठाकुर चौबीसी से उठी यह आवाज अब केवल स्थानीय विरोध तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक बड़े राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

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