वित्त मंत्री ने पेश किया केंद्र सरकार का बजट- क्या कुछ खास है इस बजट में……..

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केंद्रीय बजट 2026-27: इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश पर जोर, मध्यम वर्ग को सीमित राहत

नई दिल्ली, 1 फरवरी 2026.
वित्त मंत्री ने रविवार को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया। रिकार्ड लगातार नौवीं बार बजट प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर व्यापार, आपूर्ति शृंखला और संसाधनों को लेकर अनिश्चितता के बावजूद भारत की आर्थिक दिशा स्थिर बनी हुई है और देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह बजट ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र पर आधारित है और इसका उद्देश्य आर्थिक विकास को मजबूत करना तथा लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना है।

बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने असमंजस के बजाय ठोस फैसले लिए हैं। बड़े आर्थिक सुधार, वित्तीय अनुशासन, मुद्रा स्थिरता और सार्वजनिक निवेश पर निरंतर फोकस से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। उन्होंने बताया कि मौजूदा वैश्विक हालात में नई तकनीकें उत्पादन के तरीकों को बदल रही हैं और पानी, ऊर्जा व जरूरी खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में भारत संतुलन और समावेशन के साथ आगे बढ़ रहा है।

आर्थिक मोर्चे पर सरकार ने पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य सड़कों, रेल, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक गलियारों और शहरी बुनियादी ढांचे के निर्माण को गति देना है। वित्त मंत्री के अनुसार, इससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। बजट में पर्यावरण के लिहाज से टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–बेंगलुरु, हैदराबाद–चेन्नई, चेन्नई–बेंगलुरु, दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी के बीच सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की गई है।

आयकर से जुड़े प्रावधानों में वित्त मंत्री ने संशोधित आयकर रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा को 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च करने का प्रस्ताव किया है, जिससे करदाताओं को मामूली शुल्क के साथ अतिरिक्त समय मिलेगा। इसके साथ ही लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत शिक्षा और मेडिकल मकसद से भेजी जाने वाली राशि पर टीसीएस की दर को पांच प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत करने की घोषणा की गई है। विदेश यात्रा पैकेज पर टीसीएस की दर भी घटाकर दो प्रतिशत कर दी गई है। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए मुआवजे को कर से छूट देने का भी प्रस्ताव रखा गया है। वित्त मंत्री ने बताया कि आयकर अधिनियम, 2025 एक अप्रैल से लागू होगा, जो छह दशक पुराने कर कानून की जगह लेगा।

स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट के जरिए मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पांच क्षेत्रीय हब स्थापित करने की योजना का प्रस्ताव किया गया है। मरीजों, खासकर कैंसर से पीड़ित लोगों को राहत देते हुए 17 दवाओं को बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट देने की घोषणा की गई है। इसके अलावा दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं और खास मेडिकल फूड के व्यक्तिगत आयात पर छूट के दायरे को भी बढ़ाया गया है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योग के क्षेत्र में सरकार ने टियर-2 और टियर-3 शहरों में बुनियादी ढांचे के विकास को जारी रखने का भरोसा दिया है। एमएसएमई सेक्टर को मजबूती देने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का एमएसएमई ग्रोथ फंड बनाने का प्रस्ताव किया गया है। टेक्सटाइल क्षेत्र में मेगा टेक्सटाइल पार्क, खादी और हथकरघा को बढ़ावा देने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल, सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और रेयर अर्थ कॉरिडोर जैसी योजनाओं की भी घोषणा की गई है।

हालांकि, बजट में आयकर स्लैब या स्टैंडर्ड डिडक्शन में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। मध्यम वर्ग और वेतनभोगी करदाताओं को जिस तरह की सीधी राहत की उम्मीद थी, वह इस बजट में सीमित नजर आई। रियल एस्टेट, क्रिप्टो निवेश और आम उपभोक्ताओं को तत्काल राहत देने वाले कदमों के अभाव को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई योजनाओं का प्रभाव दीर्घकाल में दिखने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन आम आदमी की जेब पर इसका असर फिलहाल सीमित माना जा रहा है।

कुल मिलाकर केंद्रीय बजट 2026-27 को सरकार के दीर्घकालिक विकास एजेंडे से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश, आत्मनिर्भरता और वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता दी गई है।

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