किन मामलों में पुलिस गैंगस्टर एक्ट का प्रयोग करती है…….

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गैंगेस्टर एक्ट क्या है और किन मामलों में लगाया जाता है

उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए गैंगेस्टर एक्ट लागू किया गया है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य उन अपराधियों पर सख्त कार्रवाई करना है जो गिरोह बनाकर लगातार समाज विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहते हैं और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन जाते हैं।

जानकारी के गैंगेस्टर एक्ट तब लगाया जाता है जब कोई व्यक्ति या अपराधियों का समूह संगठित तरीके से बार-बार गंभीर अपराध करता पाया जाता है।

इन अपराधों में हत्या, हत्या का प्रयास, लूट, डकैती, अपहरण, फिरौती, अवैध वसूली, जमीन पर कब्जा, रंगदारी, शराब माफिया, खनन माफिया, भू-माफिया और इसी तरह के अन्य संगठित अपराध शामिल होते हैं।

ऐसे मामलों में पुलिस आरोपी के खिलाफ उसके अपराधिक इतिहास का एक गैंग चार्ट तैयार करती है, जिसमें उसके पुराने आपराधिक मुकदमों और गतिविधियों का विस्तृत विवरण दर्ज किया जाता है।

गैंग चार्ट के आधार पर सक्षम अधिकारी की अनुमति के बाद गैंगेस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है। इस कानून की खास बात यह है कि इसमें आरोपी की अवैध रूप से अर्जित संपत्ति को कुर्क करने का प्रावधान है। साथ ही, इस एक्ट के तहत दर्ज मामलों में जमानत मिलना सामान्य आपराधिक मामलों की तुलना में काफी कठिन होता है।

गैंगेस्टर एक्ट का प्रयोग उन अपराधियों पर किया जाता है जो अपराध को अपना पेशा बना चुके होते हैं और समाज में डर व दहशत का माहौल पैदा कर अपने गिरोह के जरिए अवैध गतिविधियों को अंजाम देते हैं।

प्रशासन और पुलिस के लिए यह कानून संगठित अपराध के खिलाफ एक सख्त और प्रभावी हथियार माना जाता है।

आम नागरिकों के लिए यह समझना जरूरी है कि गैंगेस्टर एक्ट कोई सामान्य कानूनी धारा नहीं है, बल्कि संगठित अपराध और माफिया तंत्र को तोड़ने के लिए बनाया गया विशेष और कठोर कानून है।

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