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शादी से पहले संबंधों पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा— विश्वास से पहले बरतें सावधानी
नई दिल्ली, 16 फरवरी 2026.
सुप्रीम कोर्ट ने शादी का वादा कर शारीरिक संबंध बनाने और बाद में विवाह से मुकरने से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान शादी से पहले संबंधों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान की खंडपीठ एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिस पर एक महिला को शादी का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने और बाद में किसी अन्य महिला से विवाह करने का आरोप है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि शादी से पहले शारीरिक संबंध बनाने के मामलों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि शादी से पहले एक लड़का और लड़की मूल रूप से अजनबी होते हैं और ऐसे में किसी पर आंख बंद कर भरोसा करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि रिश्ते की वास्तविकता को समझे बिना इस तरह के संबंध भविष्य में गंभीर विवाद और कानूनी जटिलताओं का कारण बन सकते हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि महिला और आरोपी की मुलाकात वर्ष 2022 में एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट के माध्यम से हुई थी। आरोप है कि आरोपी ने महिला को शादी का भरोसा दिलाया और इसी आधार पर उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित किए। सरकारी पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने महिला की सहमति के बिना उनके निजी पलों के वीडियो रिकॉर्ड किए और बाद में उन्हें वायरल करने की धमकी भी दी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि इस प्रकार के मामलों में विश्वास और सहमति का प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि इस तरह के मामलों में तथ्यों और परिस्थितियों की गहन जांच आवश्यक है। मामले को आगे की सुनवाई के लिए बुधवार को सूचीबद्ध किया गया है।
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