प्रशासनिक उदासीनता का शिकार, लोगों के आस्था का केंद्र निहाल दास बाबा मंदिर…….

Gyan Prakash Dubey

💥सरकार द्वारा उपेक्षित लोगों के आस्था का केंद्र बाबा निहाल दास मंदिर

NGV PRAKASH NEWS के लिये Gyan Prakash Dubey की विशेष रिपोर्ट.

बदहाल पौराणिक निहाल दास बाबा कुटी उपेक्षा का शिकार, श्रद्धालुओं की आस्था के बावजूद सुविधाओं का अभाव

बस्ती, 16 फरवरी 2026.
बस्ती में अनेक पौराणिक एवं धार्मिक स्थल है जो श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र बने हुए हैं |
उसी में मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर सरयू नदी के पावन तट पर स्थित पौराणिक बाबा निहाल दास कुटी जो लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है, लेकिन विडंबना यह है कि इतना महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल आज उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। वर्षों से यहां दूर-दराज क्षेत्रों से श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं और मनोकामना पूर्ण होने पर पूजा-पाठ और प्रसाद चढ़ाकर आस्था व्यक्त करते हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं की कमी इस स्थल की बदहाल स्थिति को उजागर कर रही है।

कुटी परिसर में एक प्राचीन पोखरा और गौशाला स्थित है, जो इस स्थान की धार्मिक और सामाजिक पहचान का हिस्सा हैं। विशेष रूप से मंगलवार और शुक्रवार को यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। लोग यहां बाबा की समाधि पर माथा टेकते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और प्रसाद चढ़ाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह स्थान चमत्कारों और आस्था का प्रतीक माना जाता है।

बाबा निहाल दास से जुड़ी एक प्रचलित कथा आज भी श्रद्धालुओं के बीच श्रद्धा और विश्वास का आधार है। बताया जाता है कि एक बार बाबा निहाल दास विशाल भंडारे का आयोजन कर रहे थे। भंडारे के दौरान पूड़ी बनाते समय तेल समाप्त हो गया। जब भंडारी ने बाबा को इसकी जानकारी दी, तो बाबा ने सरयू नदी से दो बाल्टी पानी लाकर कढ़ाई में डालने को कहा। बाबा के निर्देश पर ऐसा ही किया गया और आश्चर्यजनक रूप से कढ़ाई में पूड़ियां बनती रहीं, लेकिन तेल समाप्त नहीं हुआ। इस घटना को बाबा की दिव्य शक्ति का प्रमाण माना जाता है। आज भी क्षेत्र के लोग किसी भी बड़े धार्मिक या सामाजिक आयोजन में पूड़ी बनाते समय तेल में सरयू नदी का जल मिलाने की परंपरा का पालन करते हैं।

इतनी गहरी आस्था और पौराणिक महत्व होने के बावजूद कुटी की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां पहुंचने वाला मार्ग संकरा और जर्जर है, जिससे श्रद्धालुओं को आने-जाने में कठिनाई होती है। मंदिर परिसर की हालत भी अच्छी नहीं है और रंगाई-पुताई के अभाव में मंदिर की चमक फीकी पड़ गई है। मंदिर के पास बना पार्क उजड़ा हुआ दिखाई देता है, जबकि पोखरे में जल की मात्रा कम होने से उसमें गंदगी जमा होने लगी है, जिससे धार्मिक स्थल की गरिमा प्रभावित हो रही है।

हालांकि मंदिर के मुख्य गेट के पास कुछ दूरी पर इंटरलॉकिंग का कार्य कराया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को भविष्य में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन अभी भी समग्र रूप से इस पौराणिक स्थल के विकास और संरक्षण की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

स्थानीय श्रद्धालुओं और लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन और संबंधित विभाग इस स्थल के विकास पर ध्यान दें, तो यह स्थान धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकता है और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी नई पहचान मिल सकती है।

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