यातना के 10 वर्ष-मासूमों का वीडिओ बना बेचे डार्क वेव पर-अब…….

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10 वर्षों तक 33 बच्चों का शोषण, वीडियो डार्क वेब पर बेचे

बांदा के पूर्व जूनियर इंजीनियर और पत्नी को अदालत ने सुनाई फांसी की सजा, हर पीड़ित को 10 लाख मुआवजा

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बांदा, 21 फरवरी 2026.

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से सामने आया यह मामला मानवता को झकझोर देने वाला है। यहां सिंचाई विभाग के पूर्व जूनियर इंजीनियर और उसकी पत्नी ने करीब दस वर्षों तक बच्चों का यौन शोषण कर उनके अश्लील वीडियो बनाए और उन्हें डार्क वेब के माध्यम से विदेशों तक बेचा। अदालत ने इस जघन्य अपराध को रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी में रखते हुए दोनों दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

जांच में सामने आया कि आरोपी 2010 से 2020 के बीच बांदा और चित्रकूट क्षेत्र में सक्रिय रहे और कम से कम 33 मासूम बच्चों को अपने जाल में फंसाया।

इंटरपोल से मिली सूचना, CBI ने शुरू की जांच

साल 2020 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेंट की निगरानी के दौरान संदिग्ध डिजिटल गतिविधियां सामने आईं। यह जानकारी इंटरपोल के माध्यम से भारत की जांच एजेंसियों तक पहुंची। इसके बाद सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।

छापेमारी के दौरान आरोपियों के ठिकानों से पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए, जिनमें बच्चों के साथ किए गए घिनौने कृत्यों के वीडियो और सैकड़ों आपत्तिजनक तस्वीरें मिलीं।

लालच और डर से फंसाए जाते थे मासूम

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी बच्चों को ऑनलाइन गेम, पैसे और छोटे उपहारों का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे। बाद में उन्हें डराकर और ब्लैकमेल कर शोषण किया जाता था। कुछ पीड़ित बच्चों की उम्र मात्र तीन वर्ष तक पाई गई।

पीड़ित बच्चों की जिंदगी पर गहरा असर

इस अपराध का सबसे दर्दनाक पहलू पीड़ित बच्चों की स्थिति है। कई बच्चों को शारीरिक चोटें आईं और कुछ को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। मानसिक रूप से भी बच्चे गहरे सदमे और भय के वातावरण में जी रहे हैं। कई पीड़ित अब भी मनोवैज्ञानिक उपचार से गुजर रहे हैं।

74 गवाह, 160 पन्नों का फैसला

CBI ने अक्टूबर 2020 में मामला दर्ज किया और फरवरी 2021 में चार्जशीट दाखिल की। अदालत में कुल 74 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। विस्तृत सुनवाई के बाद पॉक्सो कोर्ट ने 160 पन्नों के फैसले में दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया।

अदालत ने आदेश दिया कि दोषियों को फांसी पर लटकाया जाए, जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, ताकि उनके पुनर्वास और भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।


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