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तेलंगाना में हारे उम्मीदवारों का ‘रिकवरी अभियान’! वोटरों से कैश और गिफ्ट वापस मांगने के आरोप, लोकतंत्र पर बड़ा सवाल
तेलंगाना, 23 फरवरी 2026.
तेलंगाना में हाल ही में संपन्न हुए म्यूनिसिपल चुनावों के नतीजों के बाद एक चौंकाने वाला विवाद सामने आया है, जिसने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि चुनाव हार चुके कई उम्मीदवार अब उन मतदाताओं के घर-घर जाकर पैसे और उपहार वापस मांग रहे हैं, जिन्हें मतदान से पहले कथित तौर पर बांटा गया था।
मामला सामने आने के बाद कई जिलों में तनाव की स्थिति बन गई है और कुछ स्थानों पर बहस से बढ़कर झड़प तक की नौबत आ गई है।
किन जिलों से सामने आए मामले?
राज्य के मेडचल मलकाजगिरी, सूर्यपेट, हद्राद्री कोठागुडेम, जगतियाल और निजामाबाद जिलों से ऐसे मामलों की खबरें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि कुछ उम्मीदवारों ने मतगणना के तुरंत बाद उन इलाकों में जाकर वोटरों से संपर्क साधा, जहां उन्हें अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।
स्थानीय स्तर पर कई जगहों पर पैसे लौटाने को लेकर तीखी नोकझोंक हुई। कुछ वीडियो क्लिप्स में उम्मीदवारों या उनके समर्थकों को घरों से साड़ी या अन्य गिफ्ट वापस लेते हुए भी देखा गया है।
मतदान से पहले बांटे गए थे कैश और गिफ्ट?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 10 फरवरी को हुए मतदान से पहले कई वार्डों में वोटरों को लुभाने के लिए 2,000 से 3,000 रुपये तक नकद राशि, प्रेशर कुकर और साड़ियां वितरित की गई थीं। हार के बाद कुछ उम्मीदवारों को संदेह हुआ कि उन्हें अपेक्षित वोट नहीं मिले, जिसके बाद कथित तौर पर “रिकवरी अभियान” शुरू किया गया।
हैदराबाद के पास येलमपेट नगर निगम क्षेत्र में एक निर्दलीय उम्मीदवार के पति द्वारा मतदाताओं से या तो पैसे लौटाने या यह स्वीकार करने के लिए दबाव बनाने की भी चर्चा है कि उन्होंने उनकी पत्नी को वोट दिया था।
सोशल मीडिया पर वायरल एक क्लिप में एक महिला वोटर से यह कहते हुए सुना गया कि यदि एक वोट इधर गया तो चार वोट उधर चले गए। एक अन्य वीडियो में कथित तौर पर एक महिला उम्मीदवार मतदाता से यह भरोसा दिलाने को कहती नजर आ रही है कि वोट उसी को दिया गया है।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
राज्य चुनाव अधिकारियों का कहना है कि अब तक उन्हें कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि वायरल वीडियो का संज्ञान लेने की बात कही गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि चुनाव से जुड़े किसी भी प्रकार के धन या उपहार की लेन-देन और बाद में उसकी वापसी की मांग नियमों के खिलाफ है और यह गंभीर अनियमितता की श्रेणी में आता है।
लोकतंत्र पर उठते सवाल
यह मामला केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी संस्कृति पर व्यापक बहस को जन्म देता है। यदि वोट खरीदने की प्रवृत्ति पहले से मौजूद थी, तो अब कथित “रिफंड पॉलिटिक्स” जैसी प्रवृत्ति लोकतंत्र की साख को और कमजोर कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति यदि बढ़ती है तो इससे मतदाता की स्वतंत्रता, गोपनीय मतदान की गरिमा और चुनावी निष्पक्षता तीनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
अब नजर इस बात पर है कि क्या संबंधित मामलों में औपचारिक शिकायतें दर्ज होंगी और चुनाव आयोग या प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई की जाएगी या नहीं। फिलहाल, तेलंगाना में चुनावी हार के बाद शुरू हुआ यह विवाद राजनीतिक हलकों के साथ-साथ आम जनता के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
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