नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के चर्चा के बीच कौन होगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री…….

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नीतीश कुमार राज्यसभा जाएंगे? बिहार में सीएम बदलने की अटकलें तेज, इन तीन नेताओं के नाम सबसे आगे

पटना, 05 मार्च.

अपुष्ट रूप से अंदर खाने चल रही चर्चा को अगर सही माने तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार केंद्र में जाने का मन बना चुके हैं और वह राज्यसभा सांसद के तौर पर अब केंद्र में रहकर जनकल्याण करना चाह रहे हैं | चर्चा के अनुसार यदि नीतीश केंद्र में जाते हैं तो उनके के केंद्र में जाने के बाद बिहार का कौन होगा भावी मुख्यमंत्री इस पर भी हो गई है |

बिहार की राजनीति में आज ( बृहस्पतिवार ) बड़ा सियासी उलटफेर देखने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। अंदरखाने चल रही राजनीतिक हलचल के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं और इसके बाद बिहार की सत्ता की कमान भारतीय जनता पार्टी के हाथों में जाने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि ऐसा होता है तो बिहार को जल्द ही नया मुख्यमंत्री मिल सकता है।

सूत्रों के मुताबिक नीतीश कुमार पटना में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं। राज्यसभा चुनाव 16 मार्च को प्रस्तावित है और उसी दिन परिणाम भी घोषित किए जाएंगे। इस संभावित राजनीतिक फैसले ने बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है और नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलों का दौर तेज हो गया है।

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राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि अगर मुख्यमंत्री पद खाली होता है तो भारतीय जनता पार्टी के तीन प्रमुख नेताओं के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। इनमें सम्राट चौधरी, नित्यानंद राय और दिलीप कुमार जायसवाल को मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है।

1👉सम्राट चौधरी का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे प्रमुख दावेदारों में बताया जा रहा है। 16 नवंबर 1968 को मुंगेर जिले के लखनपुर गांव में जन्मे सम्राट चौधरी बिहार की राजनीति में तेजी से उभरते हुए नेता हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार की राजनीति के अनुभवी नेता रहे हैं, जो छह बार विधायक और एक बार सांसद चुने गए, जबकि उनकी माता पार्वती देवी ने भी तारापुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है। शुरुआती शिक्षा गांव में प्राप्त करने के बाद उन्होंने मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की।

सम्राट चौधरी ने 1990 के दशक में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। वर्ष 1999 में राबड़ी देवी की सरकार में वे पहली बार बिहार के कृषि मंत्री बने। इसके बाद 2000 और 2010 में परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। 2010 में उन्हें बिहार विधानसभा में विपक्ष के मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। शुरुआत में राष्ट्रीय जनता दल और बाद में जनता दल यूनाइटेड से जुड़े रहे सम्राट चौधरी ने 2014 में बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए अपने समर्थक विधायकों के साथ भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। इसके बाद उन्होंने जीतन राम मांझी की सरकार में नगर विकास और आवास मंत्री के रूप में भी कार्य किया।

मार्च 2023 में भाजपा ने उन्हें बिहार प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी। इस दौरान उन्होंने नीतीश कुमार की नीतियों के खिलाफ मुखर राजनीतिक अभियान चलाया और प्रतीकात्मक रूप से सिर पर पगड़ी बांधकर यह संकल्प लिया कि जब तक नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से नहीं हटेंगे, तब तक वह पगड़ी नहीं उतारेंगे। हालांकि बाद में राजनीतिक समीकरण बदलने पर उन्होंने यह पगड़ी उतार दी। जनवरी 2024 में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद उन्हें भाजपा विधायक दल का नेता बनाया गया और वे बिहार के उपमुख्यमंत्री बने। 2025 में एनडीए सरकार बनने के बाद भी वह उपमुख्यमंत्री पद पर बने रहे और अब मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं।

2👉मुख्यमंत्री पद की दौड़ में दूसरा नाम केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का सामने आ रहा है। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखते हुए राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार आलोक कुमार मेहता को 60 हजार से अधिक वोटों के अंतर से पराजित किया था। वर्ष 1966 में जन्मे नित्यानंद राय ने हाजीपुर स्थित राज नारायण कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

लोकसभा पहुंचने से पहले वे बिहार की राजनीति में सक्रिय रहे और वर्ष 2000 से लगातार हाजीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने जाते रहे। उन्होंने बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बिहार की राजनीति में उन्हें भाजपा के प्रमुख यादव चेहरे के रूप में देखा जाता है और पार्टी उन्हें राजद के पारंपरिक यादव वोट बैंक में सेंध लगाने वाले मजबूत नेता के तौर पर पेश करती रही है।

3👉मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदारों में तीसरा नाम दिलीप कुमार जायसवाल का भी चर्चा में है। उनका जन्म 3 दिसंबर 1963 को खगड़िया जिले के गोगरी में हुआ था। वे कलवार समुदाय से आते हैं, जिसे अत्यंत पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में रखा जाता है। दिलीप कुमार जायसवाल लंबे समय तक भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं और करीब 22 वर्षों तक बिहार भाजपा के प्रदेश कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

शैक्षिक रूप से वे पीएचडी डिग्रीधारी हैं और 2009 में पूर्णिया, अररिया और किशनगंज के स्थानीय प्राधिकरण क्षेत्र से पहली बार बिहार विधान परिषद के सदस्य चुने गए थे। वे बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और वर्तमान में बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में संगठन की कमान संभाल रहे हैं।

बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार के संभावित राज्यसभा जाने की चर्चा ने सत्ता परिवर्तन की अटकलों को और तेज कर दिया है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस संभावित बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हैं और सभी की नजरें आने वाले दिनों में होने वाले घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।

सूत्रों के अनुसार अगले अगले कुछ दिन बिहार की राजनीति के लिए काफी अहम होंगे |

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