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एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के नियम बदले, शहर में 25 और गांव में 45 दिन बाद ही होगी अगली बुकिंग
नई दिल्ली, 12 मार्च 2026.
ईरान संकट के बीच देश में एलपीजी सिलेंडर को लेकर बढ़ती मांग और अफवाहों के कारण हो रही मारामारी के बीच केंद्र सरकार ने गैस सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी से जुड़े नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री ने गुरुवार को संसद में जानकारी देते हुए बताया कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतराल तय कर दिया गया है, जिससे जमाखोरी और अनावश्यक बुकिंग को रोका जा सके।
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मंत्री के अनुसार शहरी क्षेत्रों में अब एक सिलेंडर बुक कराने के बाद अगली बुकिंग कम से कम 25 दिन बाद ही की जा सकेगी, जबकि ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में यह अंतराल 45 दिन निर्धारित किया गया है। सरकार का कहना है कि कुछ जगहों पर डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर सिलेंडरों की जमाखोरी और लोगों द्वारा घबराहट में बार-बार बुकिंग करने की प्रवृत्ति देखी जा रही थी। हालांकि अधिकारियों के अनुसार यह स्थिति वास्तविक गैस की कमी के कारण नहीं बल्कि आशंका और अफवाहों के कारण बनी है। वर्तमान में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक का औसत समय लगभग ढाई दिन बताया गया है।
सरकार ने गैस डिलीवरी प्रक्रिया को भी अधिक पारदर्शी बनाने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) प्रणाली को तेजी से लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अब उपभोक्ता के मोबाइल पर भेजे गए वन टाइम कोड की पुष्टि के बिना सिलेंडर की डिलीवरी दर्ज नहीं होगी। यह व्यवस्था फिलहाल करीब 50 प्रतिशत उपभोक्ताओं के लिए लागू है, जिसे बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक करने की योजना है। इससे गैस की गलत सप्लाई, फर्जी डिलीवरी और हेरफेर पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
कमर्शियल एलपीजी को लेकर भी नई व्यवस्था लागू की गई है। तेल कंपनियां अब कमर्शियल एलपीजी की औसत मासिक मांग का केवल 20 प्रतिशत हिस्सा ही आवंटित करेंगी, ताकि जमाखोरी और काला बाजारी को रोका जा सके। मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस कदम का उद्देश्य होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि अवैध बिक्री को रोकना है। कमर्शियल एलपीजी बिना सब्सिडी के खुले बाजार में बेची जाती है और इसके लिए किसी प्रकार का पंजीकरण या बुकिंग अनिवार्य नहीं होता, जिससे अनियमितता की आशंका रहती है।
सरकार ने यह भी बताया कि गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। पिछले पांच दिनों में एलपीजी उत्पादन में लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है और अतिरिक्त गैस की खरीद भी की जा रही है। सरकार का कहना है कि देश के 33 करोड़ से अधिक परिवारों, विशेषकर गरीब और वंचित वर्ग की रसोई में गैस की कमी न होने देना प्राथमिकता है। अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को भी प्राथमिकता के आधार पर गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
नई व्यवस्था की निगरानी के लिए इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के कार्यकारी निदेशकों की तीन सदस्यीय समिति 9 मार्च को गठित की गई है। यह समिति राज्यों के नागरिक आपूर्ति विभागों और विभिन्न संगठनों के साथ बैठक कर व्यवस्था की समीक्षा कर रही है। साथ ही तेल कंपनियों के फील्ड अधिकारी और एंटी-अडल्टरेशन सेल डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर निगरानी में लगे हुए हैं।
मंत्री ने बताया कि हाल ही में 60 रुपये समायोजन के बाद बिना सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपये है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से इसकी कीमत करीब 987 रुपये होनी चाहिए थी। वैश्विक कीमतों के आधार पर प्रति सिलेंडर लगभग 134 रुपये की बढ़ोतरी की जरूरत थी, लेकिन सरकार ने इसमें से 74 रुपये का भार खुद वहन किया है। इसके चलते उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए अतिरिक्त खर्च प्रतिदिन 80 पैसे से भी कम पड़ रहा है।
सरकार के अनुसार पड़ोसी देशों की तुलना में भारत में एलपीजी अभी भी सस्ती है। पाकिस्तान में सिलेंडर की कीमत करीब 1,046 रुपये, श्रीलंका में लगभग 1,242 रुपये और नेपाल में करीब 1,208 रुपये बताई गई है। इसके अलावा तेल विपणन कंपनियों को वित्तीय सहायता देने के लिए वर्ष 2024-25 में हुए लगभग 40 हजार करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई हेतु केंद्र सरकार ने 30 हजार करोड़ रुपये की मंजूरी भी दी है।
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