उठक बैठक करने वाले ईमानदार आईएएस नें दिया इस्तीफा…….

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ईमानदार IAS का इस्तीफा: “वेतन तो मिल रहा, लेकिन जनसेवा का मौका नहीं”

लखनऊ, 1 अप्रैल 2026.

उत्तर प्रदेश के चर्चित आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने अचानक अपने पद से इस्तीफा देकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। 2022 बैच के इस अधिकारी ने अपने त्यागपत्र में स्पष्ट लिखा है कि लंबे समय से उन्हें कोई प्रभावी पोस्टिंग नहीं दी गई, जिसके चलते वे केवल वेतन तो पा रहे हैं, लेकिन जनसेवा करने का अवसर उनसे छिन गया है।

राही ने अपने इस्तीफे को “नैतिक निर्णय” बताते हुए कहा कि जब तक सिस्टम में ईमानदारी से काम करने का वास्तविक अवसर नहीं मिलेगा, तब तक पद पर बने रहना उनके लिए अर्थहीन है। उनके इस कदम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सिस्टम में सख्ती से काम करने वाले अधिकारियों के लिए जगह सिमटती जा रही है।

रिंकू सिंह राही का नाम पहली बार उस समय सुर्खियों में आया था, जब वर्ष 2009 में मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी रहते हुए उन्होंने करीब 100 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा किया था। इस साहसिक कदम की उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। माफिया तत्वों ने उन पर जानलेवा हमला किया और उन्हें सात गोलियां मारी गईं। इस हमले में उन्होंने अपनी एक आंख की रोशनी खो दी और जबड़ा भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुआ, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।

इसी जज्बे के साथ उन्होंने 13वें प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की और दिव्यांग कोटे से 2022 बैच में आईएएस बने। उनकी यह यात्रा संघर्ष, साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल मानी जाती है।

हालांकि आईएएस बनने के बाद भी उनके सामने चुनौतियां कम नहीं हुईं। शाहजहांपुर के पुवायां तहसील में एसडीएम के रूप में तैनाती के दौरान उन्होंने अनुशासन और साफ-सफाई को लेकर सख्त रुख अपनाया। एक कर्मचारी को खुले में पेशाब करते देख उन्होंने सख्त कार्रवाई की, जिसके बाद वकीलों के विरोध के बीच उनका ‘उठक-बैठक’ वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस विवाद के बाद महज 36 घंटे में उन्हें हटा दिया गया।

अब अपने इस्तीफे में उन्होंने आरोप लगाया है कि उस घटना के बाद से उन्हें कोई सक्रिय जिम्मेदारी नहीं दी गई। उन्होंने लिखा कि “वेतन मिलना ही सेवा नहीं है, असली संतोष तो तब है जब जनता के लिए काम करने का मौका मिले।”

रिंकू सिंह राही के इस्तीफे को लेकर प्रशासनिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोग इसे सिस्टम में ईमानदार अधिकारियों के हाशिए पर जाने का उदाहरण मान रहे हैं, तो कुछ इसे एक व्यक्तिगत निर्णय बता रहे हैं। हालांकि अभी तक राज्य सरकार की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

रिंकू सिंह राही की कहानी सिर्फ एक अधिकारी की नहीं, बल्कि उस जिद और जज्बे की है, जो तमाम मुश्किलों के बावजूद सच के साथ खड़े रहने की ताकत देती है। उनका इस्तीफा एक बार फिर सिस्टम और उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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