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लंबी सेवा को माना स्थायी कार्य, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला — कर्मचारियों की बहाली का आदेश
नई दिल्ली, 1 अप्रैल 2026.
देश के श्रमिक अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और दूरगामी असर वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी से लंबे समय तक लगातार काम लिया जाता है, तो उस कार्य को अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक सेवा स्वयं इस बात का प्रमाण है कि उस पद पर नियमित नियुक्ति की आवश्यकता थी।
न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व आदेश को रद्द करते हुए प्रभावित कर्मचारियों को पुनः सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया। यह मामला कानपुर नगर निगम में कार्यरत स्विचमैन कर्मचारियों से जुड़ा था, जो वर्ष 1993 से 2006 तक लगातार अपनी सेवाएं दे रहे थे।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब कोई कर्मचारी 12-13 वर्षों तक निरंतर कार्य करता है, तो उसे अस्थायी या वैकल्पिक कर्मचारी बताना न्यायसंगत नहीं है। ऐसे कर्मचारियों को अचानक सेवा से हटाना न केवल अनुचित है, बल्कि श्रम कानूनों की भावना के भी विपरीत है। पीठ ने स्पष्ट किया कि इतनी लंबी कार्यावधि यह साबित करती है कि वहां काम स्थायी प्रकृति का था और नियमित पद भी मौजूद था।
मामले में एक अहम पहलू यह भी सामने आया कि नगर निगम कर्मचारियों की उपस्थिति से जुड़े आवश्यक रिकॉर्ड अदालत में प्रस्तुत करने में असफल रहा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने श्रम न्यायालय के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यदि कोई संस्थान अदालत के निर्देश के बावजूद जरूरी दस्तावेज पेश नहीं करता, तो कर्मचारी के दावों को सही मान लिया जाएगा। कानून में इसे ‘प्रतिकूल अनुमान’ के सिद्धांत के रूप में जाना जाता है, जहां रिकॉर्ड न दिखाना संस्थान की कमजोरी माना जाता है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों की बहाली के आदेश को बरकरार रखा है, लेकिन बकाया वेतन के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यह देखा जाना आवश्यक है कि सेवा से हटाए जाने के बाद संबंधित कर्मचारी कहीं अन्यत्र कार्यरत थे या नहीं। इसी पहलू पर पुनर्विचार के लिए मामला एक बार फिर उच्च न्यायालय को भेज दिया गया है।
यह फैसला देशभर के संविदा और अस्थायी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से अनिश्चितता में काम कर रहे लाखों कर्मचारियों के लिए यह निर्णय उनके अधिकारों को मजबूती देने वाला साबित हो सकता है।
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