60 दिन तक विवेचनाएं लंबित रहने पर निरीक्षक समेत 12 दरोगा हुए निलंबित…….

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60 दिन तक लंबित रही विवेचनाएं, वाराणसी में निरीक्षक समेत 12 दरोगा निलंबित

वाराणसी, 10 अप्रैल 2026.

कानून व्यवस्था की समीक्षा के दौरान गंभीर लापरवाही सामने आने पर पुलिस आयुक्त ने बड़ी कार्रवाई करते हुए निरीक्षक समेत 12 उपनिरीक्षकों को निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई कैंट, शिवपुर और लालपुर-पांडेयपुर थानों में लंबित विवेचनाओं और खराब कार्य प्रदर्शन के आधार पर की गई है। साथ ही सभी के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

निलंबित पुलिसकर्मियों में कैंट थाने से निरीक्षक संतोष पासवान के अलावा उपनिरीक्षक आशीष श्रीवास्तव, भैरव श्रीवास्तव, मुन्ना यादव, जमुना प्रसाद तिवारी और प्रवेश कुंतल शामिल हैं। शिवपुर थाने से अशोक कुमार सिंह, कोमल यादव और आशीष कुमार सिंह पर कार्रवाई हुई है, जबकि लालपुर-पांडेयपुर थाने से प्रमोद कुमार गुप्ता, कोमल कुमार गुप्ता और विजेंद्र सिंह को निलंबित किया गया है।

पुलिस आयुक्त ने बताया कि अर्दली रूम में बृहस्पतिवार को लंबित विवेचनाओं, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य संकलन, गैर-जमानती वारंट की तामील और वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी की समीक्षा की गई। जांच में पाया गया कि कई मामलों में 60 दिन से विवेचनाएं लंबित पड़ी थीं और शिकायतों के निस्तारण की स्थिति भी संतोषजनक नहीं थी।

इसके अलावा गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) के मामलों में गिरफ्तारी तक नहीं की गई थी। बिना नंबर वाहनों के खिलाफ कार्रवाई और यातायात नियमों के उल्लंघन पर भी अपेक्षित सख्ती नहीं बरती गई।

निरीक्षण के दौरान पुलिस आयुक्त ने प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए सख्त निर्देश जारी किए। उन्होंने ट्रैवल टाइम में 25 प्रतिशत तक कमी लाने, हर प्रमुख चौराहे पर पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित करने और सड़कों पर खड़े वाहनों को क्रेन के माध्यम से हटाने के निर्देश दिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रैफिक व्यवस्था की जिम्मेदारी केवल ट्रैफिक पुलिस की नहीं है, बल्कि संबंधित थाना प्रभारी और चौकी इंचार्ज भी इसके लिए समान रूप से जिम्मेदार होंगे। साथ ही अवैध पार्किंग और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान तेज करने और जाम की समस्या के समाधान के लिए समन्वय बनाकर काम करने को कहा गया।

इसके अतिरिक्त मुकदमों में समय से सिस्टम आइडेंटिफिकेशन तैयार कर पोर्टल पर अपलोड करने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि विवेचनाओं में पारदर्शिता और तेजी लाई जा सके।

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