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चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी, सरकार ने कहा था नहीं बढ़ेंगे दाम
प्रयागराज, 30 अप्रैल 2026.
पांच राज्यों के चुनाव खत्म होने के बाद देशभर में पेट्रोल और डीजल के नए दाम जारी कर दिए गए हैं। सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल ने सुबह 6 बजे ताजा रेट अपडेट किए। हालांकि, आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
ताजा दरों के अनुसार राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2022 से ही पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के चलते कच्चा तेल 119 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। युद्ध से पहले यह कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी। ब्रेंट क्रूड 119 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल लगभग 106 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है।
केंद्र सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। चुनाव परिणाम आने के बाद भी सरकार अपने रुख पर कायम दिख रही है और फिलहाल कीमतों में कोई वृद्धि नहीं की गई है।
सोशल मीडिया पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 10 रुपये और 12.50 रुपये की बढ़ोतरी से संबंधित एक कथित आदेश वायरल हुआ था, जिसे पीआईबी फैक्ट चेक ने पूरी तरह फर्जी बताया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।
देश में सबसे सस्ता पेट्रोल अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर में 82.46 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। इसके अलावा ईटानगर, सिलवासा, दमन, हरिद्वार, रुद्रपुर, ऊना, देहरादून और नैनीताल जैसे शहरों में भी पेट्रोल अपेक्षाकृत सस्ता है।
डीजल की बात करें तो पोर्ट ब्लेयर में यह 78.05 रुपये प्रति लीटर के साथ सबसे सस्ता है। इसके अलावा ईटानगर, जम्मू, सांबा, कठुआ, उधमपुर, चंडीगढ़ और राजौरी जैसे शहरों में भी डीजल के दाम कम हैं।
वहीं, भारत के पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें काफी अधिक हैं। पाकिस्तान, चीन, श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार और भूटान जैसे देशों में ईंधन के दाम भारत की तुलना में कहीं ज्यादा हैं, जिससे वहां के लोगों पर महंगाई का दबाव बढ़ गया है।
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