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जनता की उम्मीदों की नई पहचान बनीं डीएम कृतिका ज्योत्स्ना, संवेदनशील कार्यशैली और त्वरित निर्णयों से जीत रहीं लोगों का भरोसा
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बस्ती, 13 मई 2026.
इन दिनों बस्ती जिले में अपनी कार्यशैली, संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण और त्वरित निर्णय क्षमता को लेकर लगातार चर्चा में हैं। एक जिलाधिकारी के रूप में उनका काम करने का तरीका आम जनता के बीच भरोसे और उम्मीद की नई मिसाल बनता जा रहा है। फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना, मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश देना और मामलों के शीघ्र निस्तारण की पहल करना उनकी प्रशासनिक कार्यशैली की सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है।
सुबह ठीक 10 बजे जिलाधिकारी कृतिका ज्योत्स्ना अपने कार्यालय पहुंच जाती हैं और उसके बाद जनसुनवाई का सिलसिला शुरू हो जाता है। उनके कार्यालय में रोजाना जिले के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। खास बात यह है कि जिलाधिकारी केवल औपचारिकता निभाने तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि हर शिकायत को गहराई से सुनकर समाधान की दिशा में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने की कोशिश करती हैं।
संवाददाता जब जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा तो वहां फरियादियों की लंबी कतार लगी हुई थी। इसी दौरान एक अधिवक्ता अपने मुवक्किल के साथ जिलाधिकारी के समक्ष पहुंचे। मामला तीन भाइयों के बीच लंबे समय से चल रहे भूमि बंटवारे का था। जिलाधिकारी ने पूरे मामले को ध्यान से सुना और सीधे फरियादी से पूछा कि क्या वह पहले भी इस मामले में कार्यालय आया है। फरियादी ने वर्ष 2025 में आवेदन देने की बात कही। इस दौरान वह अपने वकील की ओर देखने लगा तो जिलाधिकारी ने मुस्कुराते हुए कहा कि “उधर मत देखिए, सीधे बताइए।” इसके बाद उन्होंने तत्काल अपने स्टाफ को निर्देश देते हुए उपजिलाधिकारी हर्रैया से संपर्क कराया और आगामी थाना दिवस में मामले को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित कराने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी के इस व्यवहार और तत्परता से फरियादी संतुष्ट होकर खुशी-खुशी वापस लौटा।
इसी बीच एक महिला अपनी समस्या लेकर पहुंची। जिलाधिकारी ने पूरे धैर्य के साथ उसकी बात सुनी और संबंधित विभाग को आवश्यक निर्देश देकर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की। महिला के चेहरे पर संतोष साफ दिखाई दे रहा था।
जनसुनवाई के दौरान एक अन्य व्यक्ति ने जिलाधिकारी को नाली की गंदगी से जुड़ी शिकायत दी और बातचीत में यह भी बताया कि सिद्धार्थनगर के एडीएम उनके रिश्तेदार हैं। जिलाधिकारी ने बिना किसी प्रभाव में आए पूरी निष्पक्षता के साथ शिकायतकर्ता से मौके की तस्वीरें मांगीं। जब वह तत्काल फोटो उपलब्ध नहीं करा सका तो जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “मैं अभी 12 बजे तक कार्यालय में हूं, फोटो मंगवाकर दिखा दीजिए, तभी प्रभावी कार्रवाई हो सकेगी।” यह संवाद प्रशासनिक पारदर्शिता और तथ्यों के आधार पर निर्णय लेने की उनकी शैली को दर्शाता है।
सबसे उल्लेखनीय मामला कृषक दुर्घटना बीमा से जुड़ा रहा, जिसमें एक व्यक्ति ने बताया कि आवेदन दिए एक वर्ष बीत चुका है लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागीय अधिकारी को तत्काल निर्देशित किया। परिणाम यह रहा कि जो काम एक साल में नहीं हो सका था, वह कुछ ही घंटों में पूरा हो गया। फरियादी के चेहरे पर राहत और संतोष साफ दिखाई दे रहा था।
दिनभर जिलाधिकारी कार्यालय में फरियादियों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन कृतिका ज्योत्स्ना हर शिकायत को गंभीरता से सुनते हुए यथासंभव समाधान का प्रयास करती रहती हैं। खास बात यह भी है कि जनसुनवाई के साथ-साथ वह कार्यालय के अन्य प्रशासनिक कार्यों, लंबित फाइलों और विभागीय समीक्षा बैठकों को भी समान रूप से संभालती चलती हैं। बीच-बीच में अपने अधीनस्थ अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश देना भी उनकी कार्यशैली का हिस्सा है।
बस्ती जिले में आम लोगों के बीच यह धारणा तेजी से मजबूत हो रही है कि जिलाधिकारी कृतिका ज्योत्स्ना के पास पहुंचने वाला फरियादी खाली हाथ या निराश होकर वापस नहीं लौटता। उनकी संवेदनशीलता, अनुशासन और त्वरित निर्णय क्षमता ने उन्हें जिले में एक सक्रिय और जनहितैषी अधिकारी के रूप में स्थापित कर दिया है।
इस दौरान CRO, के साथ कुछ समय के लिए अपर जिलाधिकारी प्रतिपाल सिंह चौहान भी मौजूद रहे |
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