क्या बढ़ने वाले हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? 48 घंटे में सरकार के 3 बड़े फैसलों से बढ़ी चिंता…….

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क्या बढ़ने वाले हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? 48 घंटे में सरकार के 3 बड़े फैसलों से बढ़ी चिंता

नई दिल्ली, 14 मई 2026.

देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर चिंता गहराने लगी है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की सप्लाई पर पड़ रहे असर के बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और केंद्र सरकार की ओर से आए संकेतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बीते 48 घंटों के भीतर सरकार और शीर्ष अधिकारियों के तीन बड़े फैसलों और बयानों ने इस आशंका को और मजबूत कर दिया है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस महंगी हो सकती है।

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि एक समय के बाद यह आकलन करना पड़ेगा कि तेल कंपनियां आखिर कब तक पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को लागत से कम कीमत पर बेचती रहेंगी। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर कीमत बढ़ाने की पुष्टि नहीं की, लेकिन उनके बयान को भविष्य में दाम बढ़ने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

पुरी ने बताया कि भारत के पास फिलहाल लगभग 60 दिन का कच्चे तेल का भंडार, 60 दिन का एलएनजी स्टॉक और 45 दिन का एलपीजी भंडार उपलब्ध है। इसके बावजूद पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है।

इधर, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्विट्जरलैंड में बड़ा बयान देते हुए कहा कि अगर पश्चिम एशिया संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो सरकार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों का बोझ उपभोक्ताओं पर डालना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा और उर्वरक आयात पर काफी हद तक निर्भर है और वैश्विक सप्लाई चेन में रुकावट का असर अब भारत पर भी दिखने लगा है।

दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सबसे ज्यादा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ा है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में गिना जाता है। जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है।

इसी बीच सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले यह शुल्क 6 प्रतिशत था। प्लैटिनम पर भी आयात शुल्क बढ़ाया गया है। सरकार का मानना है कि गैर-जरूरी आयात कम करके विदेशी मुद्रा बचाई जा सकती है।

वहीं, सरकार ने चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का भी बड़ा फैसला लिया है। माना जा रहा है कि इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखना और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

इन सभी घटनाक्रमों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन क्लासेज को बढ़ावा देने की अपील को भी भविष्य की संभावित चुनौतियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

फिलहाल सरकार की ओर से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया संकट लंबा खिंचता है तो आने वाले दिनों में आम जनता पर महंगाई का नया बोझ पड़ सकता है।

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