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क्या बदलने वाले हैं भारतीय नोट? RBI के प्लास्टिक करेंसी प्लान पर तेज हुई चर्चा
नई दिल्ली, 29 मई 2026.
भारत में जल्द ही नोटों का स्वरूप बदल सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) एक बार फिर प्लास्टिक या पॉलीमर नोटों को चलन में लाने की संभावना पर गंभीरता से विचार कर रहा है। हाल ही में पटना और मुंबई में आयोजित RBI की बोर्ड बैठकों में इस विषय पर चर्चा हुई है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि देश को भविष्य में पहला प्लास्टिक नोट मिल सकता है।
दरअसल, प्लास्टिक नोटों का विचार नया नहीं है। वर्ष 2012 में भी तत्कालीन सरकार ने पांच शहरों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पॉलीमर नोट शुरू करने की योजना बनाई थी, लेकिन तकनीकी चुनौतियों के चलते उस योजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सका था। अब एक बार फिर इस दिशा में कदम बढ़ाने की तैयारी दिखाई दे रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार प्लास्टिक नोट लाने के पीछे सबसे बड़ा कारण उनकी लंबी आयु और कम रखरखाव लागत है। मौजूदा कागज आधारित नोट अपेक्षाकृत जल्दी खराब हो जाते हैं, जिससे उन्हें बार-बार बदलना पड़ता है। RBI के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 23.80 अरब पुराने और क्षतिग्रस्त नोटों को नष्ट करना पड़ा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.3 प्रतिशत अधिक था। इनमें सबसे अधिक 500 रुपये और 100 रुपये के नोट शामिल रहे।
नोटों की छपाई पर बढ़ता खर्च भी RBI के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में नोटों की छपाई पर RBI को 6,372.80 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े, जबकि एक वर्ष पहले यह खर्च 5,101.40 करोड़ रुपये था। यानी महज एक साल में नोट छपाई का खर्च एक हजार करोड़ रुपये से अधिक बढ़ गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि पॉलीमर नोट अधिक टिकाऊ होते हैं, पानी और धूल से कम प्रभावित होते हैं तथा नकली नोटों पर अंकुश लगाने में भी मददगार साबित हो सकते हैं। यही वजह है कि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और कई अन्य देशों में पहले से ही प्लास्टिक नोटों का उपयोग किया जा रहा है।
हालांकि डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के बावजूद भारत में नकदी का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। RBI के 15 मई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार देश में 42.86 ट्रिलियन रुपये की मुद्रा प्रचलन में है, जो एक वर्ष पहले की तुलना में 11.50 प्रतिशत अधिक है। विशेष रूप से 10 और 20 रुपये के नोटों की मांग में वृद्धि दर्ज की गई है।
अब निगाहें RBI के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलती है तो भारत में प्लास्टिक नोटों का नया दौर शुरू हो सकता है, जो देश की मुद्रा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव साबित होगा।
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