मौसम विभाग की चेतावनी हो रही फेल- सूख रही धान की नर्सरी किसान हो रहे परेशान…….

Gyan Prakash Dubey NGV PRAKASH NEWS

दिनांक: 17 जून 2026

मौसम विभाग की भविष्यवाणियां फेल या बदल गया मौसम का मिजाज? बस्ती में सूखे जैसे हालात से किसान परेशान

बस्ती। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) की ओर से पिछले करीब 15 दिनों से लगातार तेज आंधी, गरज-चमक के साथ भारी बारिश, वज्रपात और कहीं-कहीं ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की जा रही है। मोबाइल फोन पर दिन में दो से तीन बार अलर्ट संदेश पहुंच रहे हैं, जिनमें लोगों को घरों से बाहर न निकलने, सुरक्षित स्थानों पर रहने और बिजली गिरने से सावधान रहने की सलाह दी जा रही है। लेकिन हकीकत यह है कि बस्ती जिले में अब तक अपेक्षित बारिश नहीं हुई है और भीषण गर्मी तथा उमस से लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।

मौसम विभाग की लगातार चेतावनियों के बीच जिले में धूप का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा। आसमान में बादल आते हैं, गरजते हैं और बिना बरसे आगे निकल जाते हैं। ऐसे में अब आम लोगों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर मौसम विभाग की भविष्यवाणियों पर भरोसा किया जाए या फिर आसमान और स्थानीय मौसम के संकेतों को देखा जाए।

सबसे अधिक परेशानी किसानों को उठानी पड़ रही है। धान की खेती की तैयारी में जुटे किसानों ने नर्सरी डाल रखी है और वे मानसून की पहली अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन बारिश न होने से खेतों की जुताई, पलेवा और रोपाई की तैयारियां अधर में लटक गई हैं। किसान समझ नहीं पा रहे हैं कि खेत तैयार करें या अभी इंतजार करें। कई किसानों का कहना है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो नर्सरी भी प्रभावित हो सकती है और खेती की लागत बढ़ जाएगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों का कहना है कि हर दिन मौसम विभाग की चेतावनी सुनकर उम्मीद बंधती है कि शायद आज बारिश होगी, लेकिन शाम होते-होते उम्मीद टूट जाती है। इससे खेती-किसानी की पूरी योजना प्रभावित हो रही है। डीजल से सिंचाई करने की स्थिति में किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

उधर शहर और कस्बों में भी गर्मी का कहर जारी है। दोपहर के समय सड़कों पर निकलना मुश्किल हो रहा है। तापमान और उमस के कारण बुजुर्गों, बच्चों और मजदूर वर्ग को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि यदि बारिश नहीं हुई तो आने वाले दिनों में जल संकट और बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम विज्ञान एक संभावनाओं पर आधारित विज्ञान है और कई बार स्थानीय स्तर पर मौसम प्रणालियों में बदलाव होने से पूर्वानुमान का प्रभाव कम दिखाई देता है। हालांकि लगातार कई दिनों तक जारी चेतावनियों के बावजूद बारिश न होने से आम लोगों और किसानों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या बस्ती जिला संभावित सूखे जैसी स्थिति की ओर बढ़ रहा है या मानसून की सक्रियता में केवल अस्थायी देरी हो रही है? इसका जवाब आने वाले कुछ दिनों का मौसम ही देगा। फिलहाल किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं और हर गुजरते दिन के साथ उनकी चिंता बढ़ती जा रही है।

यदि अगले एक सप्ताह के भीतर अच्छी बारिश नहीं होती है तो धान की खेती पर असर पड़ सकता है, जिसका सीधा प्रभाव जिले की कृषि अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है।

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