IPS बजरंग प्रसाद यादव:एक जूनून जिसने गांव की माटी में पले युवक को संघर्ष और सफलता की मिसाल बना दिया…….

Gyan Prakash Dubey NGV PRAKASH NEWS

बस्ती की मिट्टी में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, इसका जीवंत उदाहरण हैं बस्ती जिले के बेटे बजरंगी प्रसाद यादव।

📍एक साधारण किसान परिवार से निकलकर आईपीएस अधिकारी बनने तक का उनका सफर संघर्ष, धैर्य और संकल्प की अद्भुत कहानी है। वर्ष 2020 में उनके पिता की निर्मम हत्या ने पूरे परिवार को झकझोर दिया। आर्थिक संकट इतना गहरा था कि यूपीएससी की तैयारी के लिए परिवार को खेत की फसल और अनाज तक बेचना पड़ा। लेकिन विपरीत परिस्थितियां भी उनके हौसलों को नहीं तोड़ सकीं।

संघर्ष, संकल्प और सफलता की मिसाल हैं आईपीएस बजरंग प्रसाद यादव

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के कलवारी थाना क्षेत्र के धोबहट गांव की माटी में जन्मे युवा आईपीएस अधिकारी बजरंग प्रसाद यादव आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं। वर्ष 2022 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 454वीं रैंक हासिल कर उन्होंने 2023 बैच के आईपीएस अधिकारी बनने का गौरव प्राप्त किया।

2 सितंबर 1998 को जन्मे बजरंग प्रसाद यादव ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से गणित, भौतिकी एवं रसायन विज्ञान विषयों के साथ बीएससी की शिक्षा प्राप्त की। सामान्य किसान परिवार से निकलकर देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है, लेकिन उनकी कहानी केवल सफलता की नहीं बल्कि संघर्ष, त्याग और अदम्य साहस की भी कहानी है।

वर्ष 2020 में उनके जीवन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा जब उनके पिता राजेश कुमार यादव की हत्या कर दी गई। गांव में अन्याय और दबंगई के खिलाफ आवाज उठाने वाले उनके पिता की असमय मृत्यु ने पूरे परिवार को संकट में डाल दिया। चार भाई-बहनों की जिम्मेदारी अचानक परिवार पर आ गई और आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई।

हालात इतने कठिन थे कि यूपीएससी की तैयारी और कोचिंग की फीस जुटाने के लिए परिवार को घर का अनाज तक बेचना पड़ा। लेकिन बजरंग ने परिस्थितियों के आगे घुटने टेकने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बना लिया। उन्होंने अपने पिता को न्याय दिलाने और परिवार के सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया। हिंदी माध्यम से तैयारी करते हुए उन्होंने लगातार संघर्ष किया और अंततः यूपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त कर आईपीएस अधिकारी बनने का सपना साकार कर दिखाया।

आज आईपीएस बजरंग प्रसाद यादव केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि उन युवाओं के लिए उम्मीद की किरण हैं जो सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। उनका जीवन संदेश देता है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदार हो और इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा सफलता का रास्ता नहीं रोक सकती।

हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाले बजरंगी प्रसाद यादव लगातार दो प्रयासों में असफल रहे। एक बार तो महज 27 अंकों से मेन्स परीक्षा में पीछे रह गए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी कमजोरियों को पहचाना, मेहनत को और धार दी और तीसरे प्रयास में अखिल भारतीय स्तर पर 454वीं रैंक हासिल कर आईपीएस अधिकारी बनने का सपना साकार कर दिखाया।

📍मुझे भी उनसे मिलने का अवसर मिला था, जब उनका चयन हो चुका था और प्रशिक्षण शुरू होने वाला था। बातचीत के दौरान उनकी सादगी, विनम्रता और सकारात्मक सोच ने प्रभावित किया। जितने सौम्य वे व्यवहार में लगे, उतना ही उनके ज्ञान, अध्ययन और विषयों की गहरी समझ ने प्रभावित किया। उनसे बात करते हुए सहज ही महसूस हो जाता था कि यह युवा आगे चलकर प्रशासनिक सेवा में अपनी अलग पहचान बनाएगा।

बजरंगी प्रसाद यादव की कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं।

बस्ती को अपने इस होनहार बेटे पर गर्व है।

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