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जंगल से मिली ‘मोगली गर्ल’ एहसास की मौत, 9 साल तक जिंदगी से लड़ती रही बहराइच की बेटी
लखनऊ 19 जून 2026।
करीब नौ वर्ष पहले बहराइच के कतरनियाघाट वन्यजीव अभ्यारण्य के घने जंगलों में मिली और पूरे देश में “मोगली गर्ल” के नाम से प्रसिद्ध हुई युवती एहसास अब इस दुनिया में नहीं रही। 18 वर्षीय एहसास का 15 जून 2026 को लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में निधन हो गया। उसकी मौत की खबर सामने आने के बाद एक बार फिर उसकी संघर्षभरी जिंदगी चर्चा का विषय बन गई है।
एहसास पहली बार जनवरी 2017 में उस समय सुर्खियों में आई थी, जब वह बहराइच जिले के कतरनियाघाट वन्यजीव अभ्यारण्य की मोतीपुर रेंज के जंगलों के पास अकेली भटकती हुई मिली थी। उस समय उसकी उम्र लगभग 8 से 10 वर्ष आंकी गई थी। मानव समाज से लगभग कट चुकी इस बच्ची का व्यवहार सामान्य बच्चों से बिल्कुल अलग था। वह चारों हाथ-पैरों के सहारे चलती थी, लोगों से डरती थी, कपड़े पहनने से इनकार करती थी और अपनी भावनाएं चीखने-चिल्लाने के माध्यम से व्यक्त करती थी।
उसकी हालत देखकर वन विभाग, पुलिस और प्रशासन भी हैरान रह गया था। बाद में उसे चिकित्सकीय देखरेख में भेजा गया और बाल संरक्षण संस्थाओं की निगरानी में रखा गया। शुरुआत में उसका नाम पूजा रखा गया, लेकिन बाद में उसे नया नाम “एहसास” दिया गया।
बीते नौ वर्षों में डॉक्टरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और देखभाल करने वालों ने उसे सामान्य जीवन से जोड़ने की भरसक कोशिश की। धीरे-धीरे उसने कपड़े पहनना, लोगों को पहचानना और कुछ हद तक सामाजिक व्यवहार सीख लिया था। हालांकि चिकित्सकों के अनुसार उसका मानसिक विकास पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया था। उसे मिर्गी के दौरे और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी लगातार बनी रहीं।
जानकारी के अनुसार, जून 2026 में उसकी तबीयत अचानक खराब हो गई थी। पहले उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया और हालत में सुधार होने पर छुट्टी दे दी गई, लेकिन 15 जून को स्वास्थ्य फिर बिगड़ने पर उसे दोबारा अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन उसकी मौत हो गई। प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फेफड़ों की बीमारी से उत्पन्न संक्रमण (सेप्टीसीमिया) को मौत का कारण बताया गया है।
एहसास की कहानी केवल एक बच्ची की कहानी नहीं थी, बल्कि यह मानव समाज, बाल संरक्षण और पुनर्वास व्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती और सीख थी। जंगल से मिली यह बच्ची अपने पीछे कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गई है। उसकी जिंदगी ने देश को यह सोचने पर मजबूर किया कि यदि कोई बच्चा समाज से कट जाए तो उसे दोबारा मुख्यधारा में लाना कितना कठिन और संवेदनशील कार्य होता है।
आज भले ही “मोगली गर्ल” एहसास इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी संघर्षभरी कहानी हमेशा लोगों के दिलों और यादों में जिंदा रहेगी।
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फोटो -AI से बना