एक और ‘निर्भया’ जैसी हैवानियत: गैंगरेप के बाद महिला के प्राइवेट पार्ट से निकली गोली, पत्थर और लकड़ी…….

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बेगूसराय में ‘निर्भया’ जैसी हैवानियत: गैंगरेप के बाद महिला के प्राइवेट पार्ट में डाली गोली, पत्थर और लकड़ी; चकिया थानाध्यक्ष सस्पेंड

बेगूसराय (बिहार): बिहार के बेगूसराय जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक खौफनाक घटना सामने आई है, जिसने दिल्ली के ऐतिहासिक ‘निर्भया कांड’ की यादें ताजा कर दी हैं। यहाँ एक 28 वर्षीय महिला के साथ 5 बदमाशों ने न सिर्फ बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म (Gangrape) किया, बल्कि उसके साथ ऐसी अमानवीय बर्बरता की जिसे सुनकर हर कोई दंग है। हैवानों ने पीड़िता के पूरे शरीर पर ब्लेड से हमला किया और उसके प्राइवेट पार्ट में पिस्तौल की जिंदा गोली (कारतूस), पत्थर और लकड़ी का टुकड़ा डाल दिया।
घटना के 6 दिन बाद जब महिला के पेट और अंदरूनी अंगों में असहनीय दर्द हुआ, तब सदर अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा किए गए अल्ट्रासाउंड और ऑपरेशन में इस खौफनाक सच का खुलासा हुआ।

शौच के लिए निकली महिला को बनाया बंधक

यह दर्दनाक घटना 11 जून 2026 की रात की है। पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि रात करीब 11:30 बजे वह घर के पास बने शौचालय में गई थी। इसी दौरान घात लगाए बैठे बदमाशों ने उसके पति के कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया।
जब महिला शौचालय से बाहर निकली, तो आरोपियों ने उसकी साड़ी से उसका मुंह बंद कर दिया और ब्लाउज फाड़कर हाथ-पैर बांध दिए। इसके बाद आरोपी उसे घसीटकर एक सुनसान अंधेरी जगह पर ले गए और पाँचों ने बारी-बारी से उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। विरोध करने पर पीड़िता के अंगों को ब्लेड से गोद दिया गया। इस दरिंदगी के दौरान महिला बेहोश हो गई, जिसका फायदा उठाकर आरोपियों ने उसके प्राइवेट पार्ट में कारतूस, पत्थर और लकड़ी के टुकड़े डाल दिए।

6 दिन बाद डॉक्टरों की जांच में हुआ खुलासा

घटना की अगली सुबह (12 जून) बदहवास हालत में पीड़िता को बेगूसराय सदर अस्पताल लाया गया। प्राथमिक उपचार और शुरुआती मेडिकल जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे घर भेज दिया। लेकिन घर लौटने के बाद भी महिला का दर्द कम नहीं हुआ और वह लगातार तड़पती रही। 17 जून की सुबह जब दर्द असहनीय हो गया, तो परिजन उसे दोबारा सदर अस्पताल लेकर पहुंचे।
अस्पताल में जब डॉक्टरों ने महिला का गहन अल्ट्रासाउंड और परीक्षण किया, तो उनके भी होश उड़ गए। डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर महिला के शरीर के अंदरूनी हिस्से से एक जिंदा कारतूस (बुलेट), कंकड़-पत्थर और लकड़ी के टुकड़े बाहर निकाले। फिलहाल पीड़िता का इलाज चल रहा है।

पुलिस की लापरवाही पर भड़का गुस्सा, थानाध्यक्ष सस्पेंड

इस संवेदनशील मामले में स्थानीय पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। पीड़िता का आरोप है कि घटना के दिन ही पुलिस को सूचना दी गई थी और 13 जून को FIR भी दर्ज हुई, लेकिन स्थानीय चकिया पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और न ही आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कोई कदम उठाया।
मामला मीडिया में आने और तूल पकड़ने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। बेगूसराय के डीआईजी (DIG) शैलेश कुमार खुद अस्पताल पहुंचे और पीड़िता से मुलाकात की। प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर डीआईजी के आदेश से चकिया थानाध्यक्ष (Station Incharge) को तुरंत प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है।

SIT का गठन, नामजद आरोपी पहले से अपराधी

मामले की जांच के लिए सदर डीएसपी-1 आनंद कुमार पांडे और डीएसपी-2 दुर्गा कुमारी के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।
पीड़िता की शिकायत पर मुख्य आरोपी रामू महतो, सूरज कुमार, नीतीश कुमार और दो अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार:

  • रामू महतो: इलाके का कुख्यात बदमाश है, जिस पर रेलवे और स्थानीय थाने में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
  • नीतीश कुमार: इसके खिलाफ पहले से आर्म्स एक्ट का मामला दर्ज है।
  • पीड़िता ने बताया कि करीब 3 महीने पहले भी इन्हीं बदमाशों ने उसके घर में घुसकर मारपीट, लूटपाट और दुष्कर्म का प्रयास किया था, लेकिन तब भी पुलिस द्वारा सख्त कार्रवाई नहीं की गई थी, जिसके कारण इनके हौसले बढ़ गए।

डीएसपी का बयान: “मामले की जांच हर वैज्ञानिक साक्ष्य (Scientific Evidence) और फॉरेंसिक दृष्टिकोण से की जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसआईटी लगातार छापेमारी कर रही है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”

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