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30 दिन में वजन घटाने का झांसा, 170 लोगों का हाईटेक फ्रॉड नेटवर्क! महिला से 1.77 करोड़ की ठगी, 80 करोड़ के घोटाले का खुलासा
सूरत/गुरुग्राम, 02 जुलाई 2026।
“30 दिन में वजन कम करें, बिना एक्सरसाइज और बिना डाइटिंग” जैसे आकर्षक विज्ञापनों के जरिए लोगों को जाल में फंसाने वाले एक हाईटेक साइबर ठगी गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। सूरत साइबर क्राइम पुलिस ने दावा किया है कि गुरुग्राम से संचालित इस नेटवर्क ने देशभर में करीब 80 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया। मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कंपनी के मुख्य संचालक सहित कई आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, ‘क्यूरेस्ट साइंस एंड वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड’ नामक कंपनी बाहर से हेल्थ एंड वेलनेस कंपनी के रूप में काम करती थी, लेकिन अंदर करीब 170 कर्मचारियों का संगठित कॉल सेंटर संचालित हो रहा था। इनमें लगभग 150 महिला टेलीकॉलर और 20 पुरुष कर्मचारी शामिल थे। महिला टेलीकॉलर फेसबुक विज्ञापन पर क्लिक करने वाले लोगों से संपर्क कर खुद को हेल्थ एडवाइजर या डॉक्टर की असिस्टेंट बताती थीं। इसके बाद कॉल कथित डॉक्टरों को ट्रांसफर कर दी जाती थी।
जांच में सामने आया कि ये तथाकथित डॉक्टर वास्तव में कॉल सेंटर के कर्मचारी थे, जो ‘डॉ. एम.के. खन्ना’ और ‘डॉ. आकाश मल्होत्रा’ जैसे नामों का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतते थे। मेडिकल शब्दावली, आत्मविश्वास से भरी बातचीत और फर्जी स्वास्थ्य रिपोर्ट के जरिए पीड़ितों को विश्वास दिलाया जाता था कि उन्हें विशेष इलाज की जरूरत है।
इसके बाद पीड़ितों को नकली दवाओं और वेट लॉस किट की श्रृंखला बेचने का खेल शुरू होता था। हर बार यह कहकर नई किट खरीदवाई जाती कि अगला चरण पूरा होने पर ही वजन कम होने का असर दिखाई देगा। इस तरह लोगों से लाखों रुपये वसूले जाते थे।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह की सबसे बड़ी चाल यह थी कि अधिकांश रकम ऑनलाइन नहीं बल्कि नकद ली जाती थी। गिरोह के सदस्य दिल्ली से फ्लाइट के जरिए अलग-अलग शहरों में पहुंचते, कथित दवा का पार्सल सौंपते और बदले में नकदी लेकर वापस लौट जाते थे, जिससे बैंकिंग रिकॉर्ड में सीमित लेनदेन ही दिखाई देता था।
मामले का खुलासा तब हुआ जब सूरत की एक महिला से पांच महीने में 1.77 करोड़ रुपये ठग लिए गए। आरोप है कि बाद में उससे 81.50 लाख रुपये और मांगे गए तथा पैसे न देने पर दवा के साइड इफेक्ट का डर दिखाया गया। शक होने पर महिला ने सूरत साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क किया।
पुलिस ने महिला के जरिए आरोपियों को नकदी लेने के लिए बुलाया और जैसे ही गिरोह का एक सदस्य रकम लेने पहुंचा, उसे गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर गुरुग्राम स्थित कॉल सेंटर पर छापा मारा गया, जहां से पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।
जांच में पता चला कि कंपनी का पंजीकरण वर्ष 2021 में हुआ था और 2022 से कथित रूप से इसी मॉडल पर लोगों को निशाना बनाया जा रहा था। पुलिस को बैंक खातों में करोड़ों रुपये के लेनदेन के साक्ष्य मिले हैं, जबकि बड़ी मात्रा में नकद वसूली किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
सूरत के एडीशनल कमिश्नर डॉ. करणराजसिंह वाघेला ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में अर्सलान, मोहम्मद हुसैन उर्फ राहुल राज, ओमप्रकाश रजाक सहित अन्य शामिल हैं। अर्सलान अलग-अलग आवाजों में डॉक्टर बनकर पीड़ितों से बात करता था, जबकि महिला टेलीकॉलर हेना और निशा कुमारी फर्जी नामों से हेल्थ एडवाइजर बनकर लोगों को झांसे में लेती थीं।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल फोन और बड़ी मात्रा में कथित नकली दवाएं बरामद की हैं। वहीं कंपनी के मुख्य निदेशक अमित गौरव, चीफ एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिसर पंकज शर्मा और मैनेजर दीपक अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
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