हाई कोर्ट के पौरुष शक्ति खत्म होने तक जेल पर उठे सवाल, आखिर कब तक रहती है पौरुष शक्ति?…….

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‘पौरुष शक्ति खत्म होने तक जेल’ वाले फैसले के बाद उठा सवाल: आखिर किस उम्र में खत्म होती है पुरुष की पौरुष क्षमता?

चंडीगढ़, 18 जुलाई 2026।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा 7 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी की मौत की सजा को संशोधित करते हुए उसे कम से कम 50 वर्ष के वास्तविक कारावास की सजा दिए जाने के बाद “पौरुष शक्ति” को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। अदालत के फैसले में प्रयुक्त “पौरुष शक्ति के खत्म होने तक” जैसी अभिव्यक्ति ने लोगों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर पुरुष की पौरुष क्षमता किस उम्र में समाप्त होती है।

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार इसका कोई निश्चित जवाब नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में होने वाले मेनोपॉज की तरह पुरुषों में ऐसी कोई तय उम्र नहीं होती, जब उनकी यौन या प्रजनन क्षमता अचानक समाप्त हो जाए। पुरुषों में यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है और व्यक्ति के स्वास्थ्य, जीवनशैली तथा हार्मोन स्तर पर निर्भर करती है।

मेडिकल शोध बताते हैं कि लगभग 30 वर्ष की आयु के बाद पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर औसतन हर वर्ष लगभग 1 प्रतिशत तक कम होने लगता है। हालांकि इसका प्रभाव सभी पुरुषों में एक जैसा नहीं होता। कई लोगों में 40 से 50 वर्ष की आयु के बीच टेस्टोस्टेरोन में कमी के कारण ऊर्जा, मांसपेशियों की ताकत, कामेच्छा और यौन क्षमता में बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसे एंड्रोपॉज कहा जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई पुरुष शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ है तो वह 75 से 85 वर्ष या उससे अधिक आयु तक भी सक्रिय यौन जीवन जी सकता है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि किसी निश्चित उम्र में पुरुष की पौरुष शक्ति पूरी तरह समाप्त हो जाती है।

चिकित्सकों का कहना है कि कुछ ऐसे मामले भी आते हैं जिसमें पुरुष 90 साल के ऊपर होने के बाद भी सेक्स के प्रति सक्रिय पाया गया है |

उच्च न्यायालय के फैसले में “पौरुष शक्ति” का उल्लेख किसी चिकित्सीय आयु सीमा के रूप में नहीं किया गया है। इसका आशय यह है कि दोषी को तब तक जेल में रखा जाए, जब तक वह इतनी अधिक आयु और शारीरिक कमजोरी की अवस्था में न पहुंच जाए कि उससे समाज, विशेषकर बच्चियों, को यौन अपराध का खतरा न रहे। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दोषी को कम से कम 50 वर्ष का वास्तविक कारावास भुगतना होगा और इस अवधि में किसी प्रकार की सामान्य रिहाई का लाभ नहीं मिलेगा।

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