पेपर लीक पर सरकार सख्त,मंत्रालय में बड़ा फेरबदल,कड़ा कानून बनाएंगे -मोदी,आंदोलन के बीच सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन…….

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देशभर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर हलचल: मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, पेपर लीक पर सरकार सख्त, आंदोलन के बीच सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन

📍1. नीट विवाद के बीच शिक्षा मंत्रालय में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, उच्च शिक्षा सचिव बदले

नई दिल्ली, 24 जुलाई 2026।

नीट-यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली को लेकर देशभर में उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। लगातार हो रही आलोचनाओं और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र ने उच्च शिक्षा विभाग में नए सचिव की नियुक्ति करते हुए कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही मजबूत करने और प्रशासनिक स्तर पर सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) की मंजूरी के बाद विनीत जोशी को उच्च शिक्षा विभाग के सचिव पद से हटाकर पंचायती राज मंत्रालय का सचिव नियुक्त किया गया है। उनकी जगह नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव बनाया गया है। गंगवार इससे पहले मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव के रूप में कार्यरत थे।

इसी क्रम में टी.के. अनिल कुमार को स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का सचिव बनाया गया है। वहीं कटिकितला श्रीनिवास को आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय से स्थानांतरित कर उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय का सचिव बनाया गया है। पीयूष गोयल को खान मंत्रालय के सचिव पद से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का महासचिव नियुक्त किया गया है।

नीट परीक्षा विवाद के बाद छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों द्वारा शिक्षा मंत्री एवं संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग लगातार उठाई जा रही थी। दिल्ली समेत कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। ऐसे माहौल में सरकार के इस प्रशासनिक फेरबदल को शिक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने और विवाद को नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


📍2. पेपर लीक माफिया पर मोदी सरकार का बड़ा एक्शन, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और कड़ी सजा वाला कानून लाने की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीट-यूजी सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आए पेपर लीक मामलों पर केंद्र सरकार का अब तक का सबसे सख्त रुख सामने रखा है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सरकार “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर काम कर रही है और अब पेपर लीक माफिया के खिलाफ और कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर जारी अपने वीडियो संदेश में कहा कि पिछले ढाई महीनों में सरकार ने पेपर लीक मामलों में तेजी से कार्रवाई की है। कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है और जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता 22 लाख छात्रों का शैक्षणिक वर्ष बचाना था और इसी कारण कम समय में दोबारा परीक्षा कराकर 19 जुलाई को परिणाम भी घोषित कर दिए गए।

प्रधानमंत्री ने बताया कि संबंधित विभागों ने देर रात एक प्रस्ताव तैयार कर उन्हें सौंपा है, जिसमें फास्ट-ट्रैक कोर्ट, दोषियों के लिए कड़ी सजा और मामलों का शीघ्र निस्तारण जैसे प्रावधान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर कैबिनेट बैठक में चर्चा होगी और अंतिम मंजूरी के बाद इसे संसद के आगामी सत्र में विधेयक के रूप में पेश करने का प्रयास किया जाएगा।

उधर, देशभर में नीट पेपर लीक को लेकर विरोध प्रदर्शन लगातार जारी हैं। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, पंजाब और बिहार सहित कई राज्यों में छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। बिहार के पटना, दरभंगा और जहानाबाद में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। कई स्थानों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए, हवाई फायरिंग की गई और लाठीचार्ज भी हुआ, जिसमें कई छात्र घायल हुए। पुलिस का कहना है कि कुछ स्थानों पर प्रदर्शन में असामाजिक तत्व भी शामिल हो गए थे।


📍3. 26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन, केंद्र से बातचीत के बाद बनी सहमति

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने नीट पेपर लीक मामले और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे सहित विभिन्न मांगों को लेकर चल रहा अपना 26 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया है। शुक्रवार देर रात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ हुई बातचीत के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया। लंबे समय से जारी आंदोलन के बीच इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रम माना जा रहा है।

अनशन समाप्त कराने के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने वांगचुक को जूस पिलाया। इसके बाद वांगचुक ने कहा कि लोकतंत्र में संवाद ही किसी भी विवाद का सबसे प्रभावी समाधान है और उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि देश में किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं होनी चाहिए और सभी लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें।

वांगचुक फिलहाल मेदांता अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं। डॉक्टरों के अनुसार लगातार 26 दिनों तक उपवास रहने के कारण उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ा है और उन्हें धीरे-धीरे सामान्य आहार दिया जाएगा। वहीं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार लोकतांत्रिक तरीके से उठाए गए सभी मुद्दों पर संवेदनशील है तथा बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी भरोसा दिलाया कि संबंधित विषयों पर सकारात्मक पहल की जाएगी।

दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों का धरना देर रात तक जारी रहा। इस बीच सोनम वांगचुक ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर पोस्ट कर बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों के आग्रह, लंबी बातचीत और देश में संभावित तनाव को देखते हुए उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का फैसला लिया है। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि किसी भी स्थिति में हिंसा का रास्ता न अपनाएं और शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखें।

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