
ज्ञान प्रकाश दुबे
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NGV PRAKASH NEWS
चुनाव ड्यूटी में लगे लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन?
अब जबकि चुनाव का अंतिम और सातवां चरण 1 जून को समाप्त हो रहा है और चुनाव आयोग भारत जैसे विशाल लोकतंत्र के चुनाव को संपन्न करा कर अपनी पीठ ठोकेगा |
लेकिन चुनाव की ड्यूटी करते वक्त कर्मचारियों,अधिकारियों,पुलिस बल एवं सुरक्षा बल के जवानों की मृत्यु का जिम्मेदार कौन होगा |
चुनाव आयोग को तथा सरकार को यह पता था कि इस साल अप्रैल महीने से ही भीषण गर्मी का प्रकोप रहेगा उसके बाद भी अपने फायदे के लिए चुनाव जून तक करवाए गए|
एसी में बैठकर चुनाव की घोषणा करना तू बहुत अच्छा लगता है लेकिन जो खुले आसमान के नीचे दिन रात अपनी ड्यूटी कर रहे हैं क्या एक बार भी चुनाव आयोग ने उनके बारे में सोचा की प्रचंड गर्मी में वह किस तरह अपनी ड्यूटी करेंगे |
प्रधानमंत्री से लेकर अधिकारियों तक जो एसी गाड़ियों में बैठकर सफर करते हैं और कुछ मिनट के लिए उसे बाहर आते हैं साथ ही जहां भी जिस मंच पर, स्थान पर वह बैठते हैं वहां भी उनको गर्मी से बचाए तो कूलर और पंखों की व्यवस्था रहती है |
सरकार से लेकर प्रशासन तक आखिर यह क्यों नहीं सोचा गया कि इस प्रचंड गर्मी में मतदाता वोट देने के लिए 2 किलोमीटर 3 किलोमीटर दूर अपने घर से जाएंगे घंटों लाइन में खड़े रहकर मतदान करेंगे क्या उनको गर्मी नहीं लगेगी या वह हीट वेव प्रूफ है |
मतदान स्थल पर एक छोटा प्रशासन के आदेश के अनुसार 18 ×18 का शामियाना लगाकर जिससे ना तो गर्मी से बचाव हो पा रहा था वरना पूरी तरह धूप से |
चुनाव ड्यूटी के दौरान पुलिस अधिकारी से लेकर होमगार्ड तक तथा मतदान अधिकारी से लेकर मतदान के दिन तैनात कर्मचारियों में से अनेक लोग गर्मी की वजह से मौत के मुंह में समा गए | अभी 31 मई को 6 होमगार्ड एक हीट वेव के शिकार होकर अस्पताल में भर्ती हुए और उनकी मृत्यु हो गई |
इन सब का जिम्मेदार कौन होगा यह नेता लोग या एसी कमरों में बैठकर निर्देश देने वाले लोग |
मतदान के दौरान कितने लोगों की जान गर्मी की वजह से चली गई उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा |
यह चुनाव फरवरी मार्च में भी तो हो सकता था | ना तो इस पर सुप्रीम कोर्ट संज्ञान ले रहा है और ना तो सरकार और प्रशासन के ऊपर कोई फर्क पड़ रहा है |
आखिर सरकार ऐसा नियम क्यों नहीं बनाती की कोई भी चुनाव अक्टूबर नवंबर तथा फरवरी और मार्च में ही होंगे |
