NGV PRAKASH NEWS

मोहन भागवत के ‘Gen Z’ वाले बयान पर अभिजीत दीपके का समर्थन, प्रदर्शनकारियों के आलोचकों पर साधा निशाना
नई दिल्ली, 07 अगस्त 2026।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के ‘Gen Z’ (नई पीढ़ी) को लेकर दिए गए बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भागवत के बयान का समर्थन करते हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने उन लोगों पर निशाना साधा, जिन्होंने हाल के छात्र आंदोलनों और प्रदर्शनकारियों की आलोचना की थी।
मोहन भागवत ने कहा- विरोध करना देशविरोध नहीं
मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी पहले की पीढ़ियों से अलग सोच रखती है। उन्होंने कहा कि आज के युवा हर बात को बिना सवाल स्वीकार नहीं करते, बल्कि उसके पीछे तार्किक कारण जानना चाहते हैं।
भागवत ने कहा कि ‘Gen Z हमारे अपने बच्चे हैं। यदि वे किसी मुद्दे पर विरोध करते हैं तो उन्हें देशविरोधी नहीं कहा जा सकता। उनकी चिंताओं को सुना जाना चाहिए। लोकतंत्र में विरोध भी संवाद का एक माध्यम है। हालांकि विरोध का उपयोग समाज में विभाजन पैदा करने के लिए नहीं होना चाहिए।’ उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि इसके लिए व्यापक संवाद जरूरी है।
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर किया समर्थन
मोहन भागवत के बयान के एक दिन बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भागवत की टिप्पणी साझा करते हुए लिखा, “जिन लोगों को इससे मतलब है, उनके लिए…”। उनके इस संक्षिप्त संदेश को उन नेताओं पर तंज माना जा रहा है, जिन्होंने हाल के छात्र आंदोलनों को विदेशी ताकतों या राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों से जोड़कर देखा था।
NEET-UG आंदोलन को लेकर पहले भी उठे थे सवाल
पिछले महीने NEET-UG पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए थे। दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के नेतृत्व में प्रदर्शन हुए, जबकि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने परीक्षा सुधार की मांग को लेकर भूख हड़ताल भी शुरू की थी।
इन आंदोलनों के दौरान भाजपा के कई नेताओं ने प्रदर्शनों पर सवाल उठाए थे। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया था कि विदेशी ताकतें छात्रों के आक्रोश का लाभ उठाने की कोशिश कर रही हैं। वहीं भाजपा के कुछ अन्य नेताओं ने भी आंदोलन में राष्ट्र-विरोधी तत्वों की मौजूदगी का दावा किया था।
बयान के बाद तेज हुई राजनीतिक चर्चा
मोहन भागवत के बयान के बाद छात्र आंदोलनों, लोकतांत्रिक विरोध और युवाओं की भूमिका को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरएसएस प्रमुख की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब शिक्षा, रोजगार और परीक्षा प्रणाली जैसे मुद्दों पर युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
NGV PRAKASH NEWS