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कारगिल युद्ध में 12 दिन में मिराज-2000 को लेजर गाइडेड बम के लिए तैयार करने वाले एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर के नए CEO
अयोध्या, 2 सितंबर 2026।
अयोध्या में निर्माणाधीन भव्य राम मंदिर के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का नाम सामने आने के बाद उनके सैन्य जीवन और खासकर 1999 के कारगिल युद्ध में निभाई गई अहम भूमिका चर्चा में है। जितेंद्र मिश्रा वही अधिकारी हैं, जिन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान मिराज-2000 लड़ाकू विमानों को लेजर गाइडेड बमों के इस्तेमाल के लिए तैयार करने वाली टीम का नेतृत्व किया था।
कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना को ऊंची चोटियों पर मजबूत ठिकाने बनाकर बैठे पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों से कड़ी चुनौती मिल रही थी। ऐसे में भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सफेद सागर के तहत हवाई कार्रवाई शुरू की। शुरुआती चरण में मिग विमानों के इस्तेमाल के बाद अधिक सटीक हमलों के लिए मिराज-2000 विमानों से लेजर गाइडेड बमों के इस्तेमाल की योजना बनाई गई।
तकनीकी चुनौती के बीच मिला 12 दिन का लक्ष्य
उस समय समस्या यह थी कि मिराज-2000 को लेजर गाइडेड बमों के इस्तेमाल के लिए जरूरी सिस्टम से लैस करने का काम अभी पूरा नहीं हुआ था। ग्वालियर एयर बेस पर इस तकनीकी समस्या को दूर करने के प्रयास चल रहे थे। युद्ध के बीच समय बेहद कम था और भारतीय वायुसेना को जल्द से जल्द इस क्षमता को ऑपरेशनल बनाना था।
तत्कालीन स्क्वाड्रन लीडर जितेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने इस चुनौती को स्वीकार किया। इजराइली तकनीक से जुड़े लिटनिंग टारगेटिंग पॉड को फ्रांसीसी मिराज-2000 के साथ एकीकृत करने का काम किया गया। इस पॉड की मदद से जमीन पर मौजूद लक्ष्य को लेजर के जरिए चिन्हित किया जा सकता था, जिसके बाद लेजर गाइडेड बम को लक्ष्य तक सटीक तरीके से पहुंचाने में मदद मिलती थी।
बताया जाता है कि सामान्य परिस्थितियों में लंबा समय लेने वाली इस तकनीकी प्रक्रिया को टीम ने युद्धकालीन जरूरत को देखते हुए महज 12 दिनों में पूरा कर लिया। इसके बाद मिराज-2000 विमानों को लेजर गाइडेड बमों के इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया।
कारगिल में सटीक हवाई हमलों ने बदली रणनीति
24 जून 1999 को मिराज-2000 विमानों ने कारगिल क्षेत्र में महत्वपूर्ण हवाई कार्रवाई की। लेजर गाइडेड बमों की मदद से पाकिस्तानी ठिकानों और महत्वपूर्ण सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया गया। इन सटीक हमलों ने ऊंची चोटियों पर मौजूद दुश्मन के ठिकानों के खिलाफ भारतीय सेना की कार्रवाई को महत्वपूर्ण हवाई समर्थन दिया।
कारगिल युद्ध के दौरान मिराज-2000 की भूमिका को भारतीय वायुसेना की बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है। वायुसेना और थल सेना के बीच बेहतर तालमेल तथा सटीक हवाई हमलों ने ऑपरेशन सफेद सागर को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
3,000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव
कारगिल युद्ध के बाद जितेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर लगातार आगे बढ़ा। उन्हें 18 से अधिक तरह के विमानों को उड़ाने और 3,000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव रहा है। उन्होंने Aircraft and Systems Testing Establishment (ASTE) में चीफ टेस्ट पायलट के तौर पर भी सेवाएं दीं। इसके अलावा फाइटर स्क्वाड्रन की कमान संभालने के साथ-साथ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी जिम्मेदारी निभाई।
1 जनवरी 2025 को जितेंद्र मिश्रा ने एयर मार्शल के पद पर पदोन्नत होकर भारतीय वायुसेना की वेस्टर्न एयर कमांड की कमान संभाली। यह कमांड देश की पश्चिमी सीमाओं की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अब सैन्य सेवा में लंबे और उल्लेखनीय अनुभव के बाद उनका नाम अयोध्या के राम मंदिर के नए CEO के रूप में सामने आया है। कारगिल युद्ध के दौरान बेहद कम समय में एक महत्वपूर्ण सैन्य तकनीकी चुनौती को पूरा करने वाली उनकी भूमिका उनके नेतृत्व, तकनीकी समझ और दबाव में निर्णय लेने की क्षमता की मिसाल के तौर पर देखी जाती है।
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