मुजरिम को गिरफ्तार करने के लिये जब दरोगा को पंक्चर की दुकान पर करना पड़ा काम…….

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पंचर की दुकान पर मैकेनिक बने पुलिसकर्मी, 1300 किमी दूर दबोचा महिला प्रधान आरक्षक का हत्यारोपी पति

सीधी, 3 सितंबर 2026।

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में करीब एक साल से फरार चल रहे महिला प्रधान आरक्षक की हत्या के आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस ने ऐसा तरीका अपनाया, जिसकी चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हो रही है। आरोपी महाराष्ट्र में छिपकर रह रहा था और पुलिस से बचने के लिए लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था। आखिरकार सीधी पुलिस की टीम ने हुलिया बदलकर पंचर की दुकान पर मैकेनिक बनकर आरोपी का इंतजार किया और जैसे ही वह वाहन में हवा चेक कराने पहुंचा, पुलिस ने उसे घेरकर गिरफ्तार कर लिया।

मामला 15 सितंबर 2025 की रात का है। सीधी पुलिस लाइन स्थित सरकारी आवास क्रमांक G-7 में महिला प्रधान आरक्षक सविता साकेत की हत्या कर दी गई थी। मृतका की पुत्री की रिपोर्ट पर कोतवाली थाने में धारा 103(1) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। पुलिस के मुताबिक सविता साकेत और उनके पति वीरेन्द्र साकेत के बीच पारिवारिक विवाद चल रहा था और घटना वाली रात भी दोनों के बीच विवाद होने की जानकारी सामने आई थी। घटना के बाद से ही वीरेन्द्र फरार था।

गुजरात से पश्चिम बंगाल तक तलाश, महाराष्ट्र में मिला सुराग

फरार आरोपी पुलिस को लगातार चकमा दे रहा था। उसकी तलाश में सीधी पुलिस ने मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात और पश्चिम बंगाल समेत कई स्थानों पर दबिश दी। तकनीकी साक्ष्यों, मुखबिर तंत्र और लगातार की जा रही पतासाजी के बाद पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी महाराष्ट्र के राजगढ़ जिले के खिरखिनदीवाड़ी क्षेत्र में एक कंपनी में ड्राइवर के तौर पर काम कर रहा है।

पुलिस के मुताबिक आरोपी रोजाना अपने वाहन की हवा चेक कराने और पंचर संबंधी काम के लिए एक स्थानीय दुकान पर पहुंचता था। पुलिस को यह जानकारी मिलते ही गिरफ्तारी की पूरी रणनीति तैयार की गई।

वर्दी उतारी, मैकेनिक बने और घंटों किया इंतजार

आरोपी को पुलिस की भनक लगती तो उसके दोबारा फरार होने की आशंका थी। इसलिए सीधी पुलिस ने सामान्य तरीके से दबिश देने के बजाय गुप्त ऑपरेशन की योजना बनाई। पुलिसकर्मियों ने अपना हुलिया बदला और पंचर की दुकान पर मैकेनिक की तरह काम करना शुरू कर दिया।

टीम के सदस्य दुकान पर पंचर बनाने, पंचर खुलवाने और वाहनों में हवा भरने जैसे सामान्य काम करते हुए आरोपी का इंतजार करते रहे। कई घंटे तक दुकान पर रहने के बाद आखिरकार वह क्षण आया, जिसका पुलिस को इंतजार था।

आरोपी रोज की तरह अपने वाहन में हवा चेक कराने दुकान पर पहुंचा। उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिन लोगों को वह सामान्य पंचर मिस्त्री समझ रहा है, वे सीधी पुलिस के जवान हैं। जैसे ही उसकी पहचान पुख्ता हुई, पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से उसे चारों तरफ से घेर लिया और मौके पर ही दबोच लिया।

₹10 हजार का इनामी था आरोपी

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी वीरेन्द्र साकेत उर्फ लाला करीब एक वर्ष से फरार था और उसकी गिरफ्तारी पर पुलिस अधीक्षक सीधी द्वारा 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को विधिवत न्यायालय में पेश किया गया, जहां से पुलिस को उसका रिमांड मिला है। मामले में आगे की विवेचना और आवश्यक वैधानिक कार्रवाई जारी है।

इन पुलिसकर्मियों की रही अहम भूमिका

पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक संतोष कोरी के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमला जोशी और उप पुलिस अधीक्षक मुख्यालय सुजीत कड़वे के मार्गदर्शन तथा थाना प्रभारी दिव्य प्रकाश त्रिपाठी के नेतृत्व में की गई।

कार्रवाई में हेड कांस्टेबल बलेंद्र, हेड कांस्टेबल के.पी. सिंह, कांस्टेबल ललित मिश्रा और साइबर टीम के कृष्ण मुरारी की महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है। पुलिस अधिकारियों ने टीम की इस रणनीतिक कार्रवाई और सफलता की सराहना की है।

खास बात यह रही कि जिस आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस करीब 1300 किलोमीटर दूर महाराष्ट्र पहुंची, उसे पकड़ने के लिए पुलिस ने वर्दी और सरकारी वाहन का सहारा लेने के बजाय खुद को पंचर मिस्त्री बना लिया। करीब एक साल से फरार आरोपी आखिरकार उसी दुकान पर पुलिस के जाल में फंस गया, जहां वह बेफिक्र होकर अपने वाहन की हवा भरवाने पहुंचता था।

नोट: सीधी पुलिस की मौजूदा अधिकारी सूची में दिव्य प्रकाश त्रिपाठी को जमोड़ी थाने का प्रभारी दिखाया गया है, जबकि इस गिरफ्तारी से जुड़ी 2-3 सितंबर की रिपोर्टों में उन्हें कोतवाली थाना प्रभारी और कार्रवाई का नेतृत्वकर्ता बताया गया है। इसलिए समाचार में मैंने गिरफ्तारी के समय की भूमिका को प्राथमिकता दी है।

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