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सरकारी पहल से बदली दिव्यांग बच्चों वाले परिवार की तस्वीर, कांशीराम आवास योजना में मिला पक्का आशियाना
बस्ती, 15 सितंबर 2026 (सूचना विभाग)।
मीडिया में चल रही लगातार खबरों तथा सामाजिक संगठनों द्वारा गरीब परिवार को सहायता उपलब्ध कराने के बाद जागे प्रशासन द्वारा परिवार को सरकारी सहायता उपलब्ध करवाई गई |
“मां पर चार दिव्यांग बच्चों की जिम्मेदारी, सिर पर छत भी नहीं, बस्ती में सरकारी मदद की आस में भटक रहा परिवार” को जिलाधिकारी ने संज्ञान में लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद जिला प्रशासन की विभिन्न विभागों की टीमों ने प्रकरण की जांच कर परिवार को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया।
यहां बताते चलें कि नगर पंचायत नगर बाजार के भैरोपुर गांव में रहने वाले रामकिशन पाण्डेय के चार बच्चे हैं, जिनमें अंकुर (18), विपिन (17), शिव कुमार (7) और सुमन (6) दिव्यांगता से ग्रसित हैं। परिवार की सबसे बड़ी समस्या आवास की थी। परिवार के पास न तो अपना घर था और न ही आवास बनाने के लिए जमीन। जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला पूर्ति अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी तथा परियोजना अधिकारी डूडा द्वारा प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की गई।
जिला पूर्ति अधिकारी की जांच में सामने आया कि नगर पंचायत नगर बाजार निवासी गुड़िया देवी के पास आय प्रमाण पत्र और बैंक पासबुक उपलब्ध नहीं थी। प्रशासन द्वारा उनके आधार के माध्यम से आय प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन कराया गया तथा बैंक खाता खुलवाने के लिए निकटतम बैंक में आवेदन कराया गया। तत्काल जनसहयोग से परिवार को दैनिक आवश्यकता के लिए 45 किलोग्राम चावल एवं किराना सामग्री उपलब्ध कराई गई। आय प्रमाण पत्र जारी होने के बाद एक सप्ताह के भीतर परिवार को अन्त्योदय राशन कार्ड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जा रही है। इसके साथ ही उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलेंडर भी उपलब्ध करा दिया गया है।
शिक्षा विभाग द्वारा भी बच्चों की शिक्षा को लेकर त्वरित कार्रवाई की गई। तीन बच्चों का नामांकन उच्च प्राथमिक विद्यालय नगर बाजार में कक्षा 7 तथा सुमन का नामांकन प्राथमिक विद्यालय रेहार में कक्षा 1 में कराया गया है। शैक्षिक सत्र 2024-25 में तीन बच्चों को स्कॉलर अलाउंस के तहत 6-6 हजार रुपये तथा विनीता को स्टाइपेंड के तहत 2 हजार रुपये की धनराशि डीबीटी के माध्यम से भेजी गई। बच्चों को व्हीलचेयर भी उपलब्ध कराई गई। वर्ष 2025-26 में अंकुर को स्कॉलर अलाउंस के तहत 6 हजार रुपये तथा विनीता को स्टाइपेंड के तहत 2 हजार रुपये डीबीटी के माध्यम से दिए गए और व्हीलचेयर उपलब्ध कराई गई। वर्ष 2026-27 में अंकुर को स्कॉलर अलाउंस दिए जाने की संस्तुति की गई है, जिसकी धनराशि शीघ्र उसके खाते में भेजी जाएगी।
शिव कुमार और विपिन को स्पेशल एजुकेटर के माध्यम से होम-बेस्ड एजुकेशन एवं शैक्षिक सहयोग दिया जा रहा है। विभाग में कार्यरत फीजियोथेरेपिस्ट अजय पाण्डेय द्वारा बच्चों की फीजियोथेरेपी भी की जा रही है। इसके अतिरिक्त डीबीटी के माध्यम से ड्रेस, मोजा, जूता एवं बैग के लिए 1,200 रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जाती है।
जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी द्वारा बच्चों के आवागमन में सुविधा के लिए एक व्हीलचेयर उपलब्ध करा दी गई है। बड़े बेटे अंकुर को दिव्यांग पेंशन दिलाने के लिए आवश्यक अभिलेख पूर्ण कराने की कार्रवाई भी की जा रही है। वहीं मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा विपिन कुमार एवं कुमारी सुमन के दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए हैं।
परिवार की सबसे बड़ी समस्या आवास के रूप में सामने आई थी, जिसका भी जिला प्रशासन ने समाधान कर दिया है। परियोजना अधिकारी डूडा द्वारा बताया गया कि दिव्यांग बच्चों के परिवार को कांशीराम आवास योजना के अंतर्गत आवास पॉकेट संख्या-01, ब्लॉक संख्या 36/423 आवंटित कर दिया गया है। इससे परिवार को सुरक्षित एवं स्थायी आवासीय सुविधा मिल गई है।
जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से अब चार दिव्यांग बच्चों वाले इस परिवार को न केवल रहने के लिए स्थायी छत मिली है, बल्कि राशन, गैस, शिक्षा, दिव्यांग प्रमाण पत्र, व्हीलचेयर और पेंशन जैसी सुविधाओं का लाभ भी उपलब्ध कराया जा रहा है। जिला प्रशासन ने कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शिता और पूरी गति के साथ पात्र एवं जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध है। परिवार ने जिला प्रशासन एवं मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है।
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