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ओडिशा-आंध्र में डीप डिप्रेशन का कहर, 193.9 मिमी बारिश से मचा हाहाकार; मलकानगिरी में पुल डूबे, सैकड़ों वाहन फंसे
भुवनेश्वर/विशाखापट्टनम | 25 सितंबर 2026
कलिंगपट्टनम के पास तट पार कर ओडिशा की ओर बढ़ा सिस्टम
बंगाल की खाड़ी में बने डीप डिप्रेशन (गहरे दबाव) ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कई इलाकों में भारी बारिश और तेज हवाओं से जनजीवन प्रभावित कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार यह सिस्टम 23 सितंबर की शाम 5:30 बजे से 7:30 बजे के बीच दक्षिण-पश्चिमी कलिंगपट्टनम के पास आंध्र प्रदेश तट को पार कर गया। इसके बाद यह उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए दक्षिण ओडिशा की ओर पहुंचा और धीरे-धीरे कमजोर होने लगा।
हालांकि इसे लेकर कई जगह “चक्रवाती तूफान अर्नब” नाम से खबरें सामने आईं, लेकिन IMD के आधिकारिक बुलेटिन में इसे चक्रवाती तूफान नहीं, बल्कि डीप डिप्रेशन बताया गया है। मौसम विभाग के अनुसार तट पार करने के बाद भी इसके प्रभाव से ओडिशा और आंध्र प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहा।
ओडिशा में 24 घंटे में औसतन 70 मिमी बारिश
डीप डिप्रेशन के प्रभाव से ओडिशा के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश हुई। मौसम विज्ञान केंद्र भुवनेश्वर के आंकड़ों के मुताबिक 24 सितंबर की सुबह 8:30 बजे तक राज्य में औसतन करीब 70 मिमी बारिश दर्ज की गई।
सबसे ज्यादा बारिश कोरापुट जिले के सिमिलिगुड़ा में 193.9 मिमी दर्ज हुई। इसके अलावा मलकानगिरी के चित्रकोंडा में 168.8 मिमी, गजपति के महेंद्रगढ़ में 153.4 मिमी और खुर्दा के टांगी में 142 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
बारिश की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राज्य के सात स्थानों पर बहुत भारी बारिश और 58 स्थानों पर भारी बारिश दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव, बाढ़ जैसी स्थिति और सड़क संपर्क बाधित हुआ।
मलकानगिरी में पुल डूबे, NH-326 पर सैकड़ों वाहन फंसे
दक्षिण ओडिशा का मलकानगिरी जिला सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल रहा। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों से पानी तेजी से नीचे आया और राष्ट्रीय राजमार्ग-326 पर बने कई पुल जलमग्न हो गए।
रिपोर्टों के अनुसार पोटेरू और कांकुरकोंडा पुलों पर करीब 2 से 3 फीट पानी बहता रहा, जबकि कन्याश्रम पुल पर भी करीब तीन फीट तक पानी पहुंच गया। इसके चलते मलकानगिरी से मोटू और कालीमेला तथा कालीमेला से पोडिया के बीच आवागमन प्रभावित हुआ। कई जगहों पर सैकड़ों वाहन फंस गए।
सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित पुलों पर बैरिकेडिंग कर यातायात को नियंत्रित किया और कुछ मार्गों पर वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से भेजा। लगातार बारिश के कारण मलकानगिरी के बेयापाड़ा घाट में भूस्खलन भी हुआ, जिससे 18 गांवों का सड़क संपर्क प्रभावित हुआ। चित्रकोंडा घाट को भी एहतियातन बंद किया गया।
दक्षिण ओडिशा में रेड और ऑरेंज अलर्ट
डीप डिप्रेशन के कमजोर पड़ने के बावजूद इसके प्रभाव से बारिश का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। IMD ने दक्षिण ओडिशा के कई जिलों में भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी रखी। नबरंगपुर में रेड वार्निंग तथा कोरापुट, मलकानगिरी समेत कई जिलों में ऑरेंज वार्निंग जारी की गई।
समुद्र में भी स्थिति खराब रही। IMD के बुलेटिन के अनुसार ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में तेज हवाओं और खराब समुद्री परिस्थितियों के चलते मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई थी। तटीय इलाकों में हवा के झोंकों की गति करीब 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की चेतावनी दी गई थी।
आंध्र प्रदेश में भी भारी बारिश का असर
डीप डिप्रेशन का सबसे पहला असर उत्तर आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में देखने को मिला। कलिंगपट्टनम, श्रीकाकुलम और आसपास के इलाकों में भारी बारिश तथा तेज हवाएं चलीं। विशाखापट्टनम में भी भारी बारिश दर्ज की गई और कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी।
तट पार करने के बाद सिस्टम उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ता गया और 24 सितंबर को दक्षिण ओडिशा तथा उससे लगे इलाकों के ऊपर पहुंच गया। IMD के अनुसार इसके बाद इसके धीरे-धीरे कमजोर होकर सामान्य डिप्रेशन में बदलने की संभावना थी।
प्रशासन अलर्ट, राहत और बचाव पर नजर
भारी बारिश और संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए ओडिशा प्रशासन ने प्रभावित जिलों में निगरानी बढ़ा दी। राहत एवं बचाव दलों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया। कई स्थानों पर सड़क से मलबा हटाने और यातायात बहाल करने का काम शुरू किया गया।
हालांकि शुरुआती आशंकाओं के बीच ओडिशा सरकार ने 24 सितंबर की रात तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं होने की बात कही थी। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी जारी रखने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखी।
मौसम विभाग की निगरानी में यह सिस्टम अब कमजोर हो रहा है, लेकिन इसके प्रभाव से ओडिशा के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। खासकर दक्षिण ओडिशा के पहाड़ी और निचले इलाकों में जलभराव, अचानक बाढ़ और भूस्खलन को लेकर प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है।
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