📍 वीडियो पोस्ट कर बताया नई पारी की शुरुआत के बारे में…….
📍 लोगों को उनके व्हाट्सएप से जुड़ने की किया अपील…….
📍 मुझ पर नहीं अपने आप पर करें भरोसा -दिव्या मित्तल

NGV PRAKASH NEWS
IAS से इस्तीफा देने के बाद राजनीति में उतरेंगी दिव्या मित्तल, बोलीं- किसी दल के साथ नहीं, जनता के साथ करूंगी राजनीति
लखनऊ, 29 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद अपनी अगली राजनीतिक पारी को लेकर तस्वीर साफ कर दी है। करीब 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद आईएएस से अलग हुईं दिव्या मित्तल ने मंगलवार को करीब नौ मिनट का वीडियो संदेश जारी कर राजनीति में आने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि वह राजनीति करेंगी, लेकिन फिलहाल किसी स्थापित राजनीतिक दल के साथ नहीं जाएंगी, बल्कि आम लोगों के साथ मिलकर अपनी राजनीतिक राह तैयार करेंगी। उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत उत्तर प्रदेश से करने की बात कही और प्रदेश को अपनी “कर्मभूमि” बताया।
दिव्या मित्तल का यह ऐलान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उनके आईएएस पद से इस्तीफा देने के बाद से ही उनके राजनीति में आने की अटकलें लग रही थीं। उनका इस्तीफा सितंबर में स्वीकार हुआ था और इसके बाद वह प्रशासनिक जिम्मेदारियों से पूरी तरह मुक्त हो गई थीं।
“आगे क्या? राजनीति”
वीडियो की शुरुआत में दिव्या मित्तल ने कहा कि कुछ दिन पहले उन्होंने आईएएस से त्यागपत्र दिया था और इसके बाद लोगों के मन में कई सवाल थे कि आखिर वह आगे क्या करने वाली हैं। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों तक उन्होंने इन सवालों का जवाब इसलिए नहीं दिया क्योंकि उन्हें खुद हौसला जुटाना था और उनके सामने एक बड़ा काम था।
इसके बाद उन्होंने सीधे कहा कि उनके आगे का रास्ता राजनीति है।
दिव्या मित्तल ने अपने फैसले की वजह बताते हुए कहा कि वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं जिनकी आवाज किसी सरकारी दफ्तर तक नहीं पहुंच पाती और अगर पहुंचती भी है तो कई बार सुनी नहीं जाती। उन्होंने कहा कि वह देश की आजादी के करीब 80 वर्षों के दौरान जनता से जुड़े अधूरे सवालों का “हिसाब” चाहती हैं।
पहाड़ी गांव में स्कूल का सवाल
दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक अनुभव का एक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि जब वह लहुरिया दह की पहाड़ी पर पानी पहुंचाने के लिए निरीक्षण कर रही थीं, तभी एक महिला उनके पास आई। उन्हें लगा कि महिला पेंशन या पक्के मकान जैसी किसी जरूरत को लेकर आई होगी।
लेकिन महिला ने उनसे अपने गांव में आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल की मांग की।
दिव्या मित्तल के अनुसार, उस गांव में स्कूल केवल पांचवीं कक्षा तक था। इसके बाद बच्चों की पढ़ाई जंगल और पहाड़ के बीच रुक जाती थी। उन्होंने बताया कि उस समय महिला के अपने घर में पानी की सुविधा भी नहीं थी, लेकिन उसने अपने लिए पानी या मकान नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के लिए स्कूल मांगा।
उन्होंने कहा कि उन्होंने नियमों को देखा और स्कूल को स्वीकृति दी, लेकिन तीन साल बाद भी स्कूल का निर्माण शुरू नहीं हो पाया। इसी अनुभव को सामने रखते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि जब पैसा, नियम और स्वीकृति उपलब्ध थी तो काम क्यों नहीं हुआ?
दिव्या मित्तल ने इसे “इरादे” का सवाल बताते हुए कहा कि अगर इरादा हो तो पहाड़ भी रास्ता दे देता है, लेकिन इरादा न हो तो एक फाइल ही पहाड़ बन जाती है।
जमीन का पट्टा मिला, लेकिन कब्जा नहीं
पूर्व आईएएस अधिकारी ने एक दूसरे मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि विशेष सचिव के रूप में काम करने के दौरान एक व्यक्ति अपने कागज और उम्मीदों को एक पन्नी में लपेटकर उनके पास आया था।
उस व्यक्ति ने बताया कि वह भूमिहीन था और एक एसडीएम ने उसे सरकारी जमीन का छोटा सा टुकड़ा पट्टे पर दिया था। उसके पास कागज तो थे, लेकिन जमीन पर कब्जा नहीं मिला था।
दिव्या मित्तल के अनुसार, उन्होंने संबंधित दस्तावेज देखे तो मामले में भेजी गई रिपोर्ट गलत पाई गई। संबंधित जिले के अधिकारी से बात करने पर रिपोर्ट के गलत होने की बात स्वीकार की गई और रिपोर्ट वापस हुई। रिपोर्ट तैयार करने वाले के खिलाफ कार्रवाई भी हुई।
लेकिन इसके बाद असली सवाल आया—कब्जा दिलाने का।
दिव्या मित्तल ने बताया कि उन्होंने दो बार फोन किया और तीन बार अधिकारियों से कहलवाया, लेकिन वहां से जवाब मिला कि “ऊपर से मना किया गया है।”
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर यह “ऊपर” कौन है? उनके मुताबिक संविधान में जनता को सर्वोच्च माना गया है, इसलिए किसी व्यक्ति को अपने अधिकार के लिए इधर-उधर क्यों भटकना पड़े?
उन्होंने कहा कि सरकारी मदद अगर ऊपर से मिले तो वह कृपा हो सकती है, लेकिन न्याय किसी की कृपा नहीं, नागरिक का अधिकार है।
सड़क, गड्ढे और हादसों पर भी उठाए सवाल
दिव्या मित्तल ने ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों और बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश में हजारों गांव ऐसे हैं जहां आज भी सड़क नहीं है। कहीं नदी है तो पुल नहीं है और बरसात के दौरान गांव टापू में बदल जाते हैं।
उन्होंने सड़कों के गड्ढों का जिक्र करते हुए कहा कि इन रास्तों से स्कूल जाने वाले बच्चों के पैरों पर कीचड़ लगता है, लेकिन उन गड्ढों की परेशानी उन लोगों तक नहीं पहुंचती जो निर्णय लेने की स्थिति में हैं।
उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को यह जानकारी नहीं है, ऐसा नहीं है। उन्हें पता होता है कि गड्ढा कहां है, फाइल नंबर क्या है और कितनी मौतें हुई हैं। उनके मुताबिक समस्या जानकारी की नहीं बल्कि फिक्र की कमी की है।
पेपर लीक और युवाओं के भविष्य पर चिंता
दिव्या मित्तल ने शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों को भी अपने राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि उन्हें बचपन में यह बताया गया था कि “पढ़ोगे तो बढ़ोगे” और उन्होंने पढ़ाई की, लेकिन आज के बच्चों के सामने सवाल अलग हैं।
उन्होंने पेपर लीक का उदाहरण देते हुए कहा कि युवा वर्षों तक परीक्षा की तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत और भविष्य को प्रभावित करती हैं।
उन्होंने उन परिवारों का भी जिक्र किया जो अपनी जमीन गिरवी रखकर बेटे को इंजीनियर बनाते हैं या मां अपने गहने बेचकर बेटी की पढ़ाई और कोडिंग पर खर्च करती है।
AI और रोजगार को लेकर भी सवाल
दिव्या मित्तल ने तेजी से बढ़ती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक को लेकर युवाओं की रोजगार संबंधी चिंताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बहुत से काम AI द्वारा किए जा सकते हैं और युवाओं के मन में अपने भविष्य को लेकर सवाल हैं।
उन्होंने खुद को दो बेटियों की मां बताते हुए कहा कि वह भी इस भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना था कि हो सकता है कि आज इन सवालों के सभी जवाब किसी के पास न हों, लेकिन कम से कम इन मुद्दों पर सोच और चर्चा तो होनी चाहिए।
उनके अनुसार, राजनीति में सत्ता और शोर तो है, लेकिन भविष्य को लेकर पर्याप्त सोच नहीं दिखाई देती। उन्होंने इसी “न सोचने” का हिसाब मांगने की बात कही।
“उद्देश्य केवल राजनेता बदलना नहीं, राजनीति बदलना है”
दिव्या मित्तल ने अपने राजनीतिक प्रवेश का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका मकसद केवल एक राजनेता को बदलना नहीं है, बल्कि राजनीति के तरीके को बदलना है।
उन्होंने इरादे की राजनीति, न्याय की राजनीति, फिक्र की राजनीति और सोच की राजनीति की बात की।
उनका कहना था कि राजनीति ऐसी नहीं होनी चाहिए जिसमें लोगों को केवल संख्या के रूप में देखा जाए या सत्ता तक पहुंचने की सीढ़ी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि वह ऐसी राजनीति चाहती हैं जिसमें जनता को सुना जाए और जनता को ही मंजिल माना जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी राजनीतिक दल के झंडे के नीचे राजनीति शुरू करने के बजाय सीधे लोगों के साथ जुड़कर आगे बढ़ना चाहती हैं।
राजनीतिक विरोध और अफवाहों पर भी बोलीं
दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो में राजनीति में आने के तुरंत बाद सामने आई चर्चाओं और आरोपों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके समर्थन में आम लोगों की प्रतिक्रिया आने के साथ ही एक राजनीतिक दल के प्रदेश प्रवक्ता की ओर से उनके बारे में ऐसी मुलाकात का दावा किया गया जो उनके मुताबिक हुई ही नहीं थी।
उन्होंने इसे महिलाओं और नए लोगों को राजनीति से डराने की कोशिश के रूप में देखा और कहा कि वह इससे डरने वाली नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि वह सवाल पूछती रहेंगी ताकि देश की छोटी बच्चियां भी अपने मन की बात कह सकें और उन्हें डराकर चुप न कराया जा सके।
पैसा, बाहुबल और जातीय समीकरण पर क्या कहा?
दिव्या मित्तल ने माना कि राजनीति में प्रवेश के लिए उनके पास न तो चुनावी राजनीति में इस्तेमाल होने वाला बड़ा पैसा है, न बाहुबल और न ही जाति-धर्म का कोई राजनीतिक समीकरण।
लेकिन उन्होंने कहा कि वह इसी तरीके की राजनीति करना भी नहीं चाहतीं।
उन्होंने सवाल किया कि चुनाव में खर्च होने वाला पैसा आखिर कहां से आता है और कहा कि वह ऐसा पैसा खर्च करने के बजाय सड़क, पुल और स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देना चाहती हैं।
उन्होंने बाहुबल के बजाय जनता से मिलने वाली शक्ति की बात की। साथ ही कहा कि अधिकारी रहते हुए उन्होंने किसी व्यक्ति के साथ न्याय करने से पहले उसका नाम, जाति या धर्म नहीं पूछा और राजनीति में भी ऐसा नहीं करेंगी।
उत्तर प्रदेश से शुरू होगी राजनीतिक यात्रा
दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो में साफ कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा उत्तर प्रदेश से शुरू होगी।
उन्होंने कहा कि जब वह अधिकारी बनकर उत्तर प्रदेश आई थीं तो प्रदेश के लोगों ने उन्हें अपनी बेटी की तरह अपनाया। उन्होंने लोगों द्वारा घर का खाना खिलाने, सिर पर हाथ रखने और कठिन समय में साथ देने का जिक्र किया।
उन्होंने उत्तर प्रदेश की मिट्टी को अपनी कर्मभूमि बताते हुए कहा कि इसी वजह से वह अपनी राजनीतिक शुरुआत भी यहीं से करेंगी।
“उत्तर प्रदेश में कुछ नहीं बदलता”—इस धारणा पर सवाल
दिव्या मित्तल ने उस धारणा को भी चुनौती दी कि उत्तर प्रदेश में बदलाव संभव नहीं है।
उन्होंने देश के स्वतंत्रता के बाद के सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के बारे में अलग-अलग समय में कई आशंकाएं जताई गईं, लेकिन देश ने लोकतंत्र को कायम रखा।
उन्होंने उत्तर प्रदेश के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने प्रशासनिक कार्यकाल में भी ऐसे उदाहरण देखे जहां लोगों ने स्वयं आगे आकर समस्याओं के समाधान में भूमिका निभाई।
उन्होंने देवरिया में “ऑपरेशन कब्जा मुक्ति” का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लोगों ने स्वयं सरकारी जमीनों से अपने कब्जे छोड़े।
“मुझ पर भरोसा मत करिए, अपने आप पर करिए”
वीडियो के अंतिम हिस्से में दिव्या मित्तल ने लोगों से सीधे जुड़ने की अपील की।
उन्होंने कहा कि देश के लोग लंबे समय से किसी नेता या मसीहा का इंतजार करते रहे हैं, लेकिन बदलाव के लिए किसी एक व्यक्ति का इंतजार करने के बजाय लोगों को खुद आगे आना होगा।
उन्होंने कहा कि वह शिक्षकों, डॉक्टरों, किसानों, मजदूरों, वकीलों, छात्रों और उन माताओं को अपने साथ जोड़ना चाहती हैं जिन्हें अपने बच्चों के भविष्य की चिंता है।
उनके मुताबिक नई राजनीति कोई एक व्यक्ति नहीं बना सकता। इसके लिए गांव-कस्बों में काम करने वाले लोगों से लेकर अपनी बात लोगों के सामने रखने वाले नागरिकों तक सभी की भागीदारी जरूरी होगी।
लोगों से WhatsApp के जरिए जुड़ने की अपील
दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो में लोगों से कमेंट करने अथवा WhatsApp के माध्यम से उनसे जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में लोगों के साथ मिलकर ऐसा मंच तैयार किया जाएगा जो राजनीतिक दबावों से डरने के बजाय देश के भविष्य को लेकर चिंतित होगा।
उन्होंने अंत में एक ऐसे भविष्य की कल्पना रखी जिसमें कोई व्यक्ति अपने कागज पन्नी में लपेटकर सरकारी दफ्तर पहुंचे तो उसे किसी सिफारिश या फोन की जरूरत न पड़े और वह घर लौटकर अपने बच्चे से कह सके कि आज उसके साथ न्याय हुआ।
दिव्या मित्तल का यह राजनीतिक ऐलान फिलहाल किसी पार्टी में शामिल होने की घोषणा नहीं है। उन्होंने अपने वीडियो में स्पष्ट रूप से कहा है कि वह किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं, बल्कि जनता के साथ राजनीति करने की दिशा में आगे बढ़ेंगी। उनके स्वतंत्र राजनीतिक मंच का संगठनात्मक स्वरूप, सदस्यता, चुनावी रणनीति और भविष्य में चुनाव लड़ने को लेकर विस्तृत योजना अभी सामने नहीं आई है।
NGV PRAKASH NEWS