NGV PRAKASH NEWS

यूपी में राज्यसभा के लिए बीजेपी ने खोले पत्ते, 8 नामों में सामाजिक संतुलन का संदेश; बस्ती में हरीश द्विवेदी के समर्थकों को मायूसी
बस्ती, 5 अक्टूबर 2026.
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की खाली होने वाली सीटों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपने आठ उम्मीदवारों के नाम सामने रख दिए हैं। पार्टी की ओर से घोषित नामों में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पाण्डेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं। सूची सामने आने के बाद जहां पार्टी के भीतर सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है, वहीं टिकट की उम्मीद लगाए बैठे कई नेताओं और उनके समर्थकों को निराशा भी हाथ लगी है।
बीजेपी की इस सूची को केवल राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक परिस्थितियों और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। उम्मीदवारों के चयन में पिछड़े, दलित और सवर्ण वर्गों के बीच संतुलन साधने की कोशिश साफ दिखाई देती है।
आठ नामों में सामाजिक समीकरण पर नजर
घोषित सूची में तीन OBC, दो दलित और तीन सवर्ण चेहरे शामिल हैं। OBC वर्ग से धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल और श्रुति गंगवार को जगह मिली है। धर्मपाल सिंह लोधी समाज से आते हैं, जबकि प्रकाश पाल बीजेपी के पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। श्रुति गंगवार का नाम कुर्मी समाज के प्रतिनिधित्व से जोड़ा जा रहा है।
दलित समाज से विद्यासागर सोनकर और प्रियंका सिंह रावत को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पाण्डेय ब्राह्मण समाज से तथा राम प्रताप सिंह चौहान राजपूत समाज से आते हैं।
इस तरह पार्टी ने आठ सीटों के लिए उम्मीदवार तय करते हुए अलग-अलग सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है।
बस्ती में हरीश द्विवेदी के समर्थकों को टिकट की थी उम्मीद
बीजेपी की सूची में बस्ती जिले के राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का माहौल है। बस्ती जिले से दो बार सांसद रह चुके और वर्तमान में बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी के समर्थकों को उम्मीद थी कि संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका और राजनीतिक कद को देखते हुए पार्टी उन्हें राज्यसभा भेज सकती है।
राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा के बाद यह उम्मीद पूरी नहीं हुई। हरीश द्विवेदी का नाम सूची में नहीं होने से उनके समर्थकों में मायूसी देखी जा रही है। हालांकि पार्टी ने संगठन में उनकी मौजूदा जिम्मेदारी को देखते हुए उन्हें किसी अन्य महत्वपूर्ण भूमिका में बनाए रखा है, लेकिन राज्यसभा के टिकट को लेकर समर्थकों के बीच चल रही चर्चाओं पर फिलहाल विराम लग गया है।
संगठन से जुड़े चेहरों पर भरोसा
बीजेपी की इस सूची की एक खास बात यह भी है कि पार्टी ने कई चर्चित नामों के बजाय संगठन और प्रदेश की राजनीति में सक्रिय चेहरों को आगे किया है। इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी राज्यसभा के जरिए अपने संगठनात्मक ढांचे को भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना चाहती है।
सूची में प्रकाश पाल का नाम इसका प्रमुख उदाहरण है। इसी तरह अन्य उम्मीदवारों के चयन में भी क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखने की चर्चा है।
दो महिलाओं को भी मिला मौका
आठ उम्मीदवारों में प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार दो महिला चेहरे हैं। प्रियंका सिंह रावत बाराबंकी से सांसद रह चुकी हैं, जबकि श्रुति गंगवार का राजनीतिक आधार बरेली क्षेत्र और कुर्मी समाज से जुड़ा माना जाता है।
महिला प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी बीजेपी की यह सूची महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी ने राज्यसभा के लिए दो महिला चेहरों को जगह देकर इस वर्ग को भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का संदेश दिया है।
2027 के विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा चयन
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची को लेकर राजनीतिक विश्लेषण शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण के बीच बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों में OBC और दलित वर्गों को खास प्रतिनिधित्व दिया है।
आठ में पांच नाम पिछड़े और दलित वर्गों से जुड़े हैं, जबकि तीन उम्मीदवार सवर्ण समाज से हैं। ऐसे में इसे बीजेपी की सामाजिक संतुलन वाली रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
राज्यसभा के लिए घोषित नामों ने कई संभावित दावेदारों की उम्मीदों पर विराम लगाया है। इनमें बस्ती के हरीश द्विवेदी का नाम भी शामिल है, जिनके समर्थक राज्यसभा में उनकी संभावित एंट्री को लेकर काफी उम्मीद लगाए हुए थे। अब पार्टी की ओर से घोषित सूची के बाद समर्थकों को मायूसी जरूर हुई है, लेकिन हरीश द्विवेदी की संगठन में मौजूदा जिम्मेदारी को देखते हुए बस्ती की राजनीति में उनकी भूमिका को लेकर चर्चाएं आगे भी जारी रहने की संभावना है।
NGV PRAKASH NEWS