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मां की अंतिम विदाई में 15 किलोमीटर चला हाथियों और ट्रैक्टरों का काफिला, करीब 1000 लोग हुए शामिल
पालतू हाथी मोहन और परमा ने आगे चलकर दी भावुक विदाई
संभल, 8 अक्टूबर 2026.
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 74 वर्षीय रामबेटी देवी की मौत के बाद उनकी अंतिम यात्रा ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अलीगढ़ के अस्पताल में बीमारी के चलते निधन के बाद परिवार ने उन्हें अनोखे और भावुक अंदाज में अंतिम विदाई दी। गांव से राजघाट गंगा घाट तक करीब 15 किलोमीटर लंबी शव यात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों लोग और ट्रैक्टरों का लंबा काफिला शामिल हुआ।
इस अंतिम यात्रा की सबसे खास बात यह रही कि सबसे आगे मृतका के पालतू हाथी मोहन और परमा चल रहे थे। उनके पीछे रामबेटी देवी की अर्थी, भगवान शिव और भगवान कृष्ण की झांकी तथा सैकड़ों ट्रैक्टरों का काफिला चल रहा था। अंतिम यात्रा को देखने के लिए रास्ते में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।
पति की मौत के बाद हाथियों को परिवार की तरह पाला
मामला संभल के रजपुरा थाना क्षेत्र के ब्यौरा गांव का है। मृतका के बेटे मनवीर के मुताबिक, वर्ष 2012 में उनके पिता के निधन के बाद उनकी मां रामबेटी देवी ने दोनों हाथियों मोहन और परमा को बेहद प्यार से पाला। दोनों हाथी परिवार के सदस्यों की तरह घर में रहते थे।
हाथियों से रामबेटी देवी का गहरा लगाव था। इसी वजह से क्षेत्र में उनके परिवार की पहचान भी ‘हाथी वाले परिवार’ के रूप में बन गई थी। मां की मौत के बाद दोनों हाथी भी काफी उदास नजर आए।
15 किलोमीटर तक चलता रहा अंतिम यात्रा का काफिला
रामबेटी देवी के बेटे मनवीर और चरन सिंह ने मां को विशेष विदाई देने का फैसला किया। गांव से शुरू हुई अंतिम यात्रा करीब 15 किलोमीटर का सफर तय कर राजघाट गंगा तट पहुंची।
यात्रा में हाथियों के साथ भगवान शिव-कृष्ण की झांकी और बड़ी संख्या में ट्रैक्टर शामिल रहे। बताया गया कि इस अंतिम यात्रा में करीब 1000 लोग शामिल हुए। रास्ते में लोगों की भीड़ इस अनोखी अंतिम यात्रा को देखने के लिए जमा होती रही।
रामबेटी देवी और उनके पालतू हाथियों के बीच वर्षों से रहे इस भावनात्मक रिश्ते के कारण यह अंतिम यात्रा पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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