गाँवों तक पंहुचा न्यूड डीप फेक वीडियो बना कर मानसिक यन्त्रणा देने कुत्सित प्रयास

ज्ञान प्रकाश दुबे

ए आई और डीप फेक का बढ़ता दायरा और इसके नुकसान

AI और डीप फेक द्वारा अश्लील वीडियो तथा फोटो बनाकर लोगों को बदनाम करने (खासकर बड़ी-बड़ी हस्तियां महिलाओं तथा लड़कियों को) किसी से जलन बस और दुश्मनी निकालने के लिए उसका न्यूड फोटो या वीडियो बनाकर वायरल कर देना या किसी साइबर एक्सपर्ट नहीं बल्कि आजकल गांव के लड़के भी कर रहे हैं |
बगैर कोई काम किये हर हाथ में स्मार्टफोन नजर आना आम बात हो गई है, रही सही कसर सरकार द्वारा वोट बैंक के खातिर कक्षा 10 तथा 12 पास करने स्मार्टफोन जिसको सरकार उनकी पढ़ाई में मदद के लिए दे रही है लेकिन इसका दुरुपयोग हो रहा है | खासकर ग्रामीण क्षेत्र के लड़के इसका जमकर दुरुपयोग लड़कियों की फोटो इंस्टाग्राम फेसबुक व्हाट्सएप से उठाकर उनका न्यूड वीडियो या फोटो बनाकर उन्हें बदनाम करने के लिए कर रहे हैं |

👉 आइये जानते हैं विशेषज्ञ इसके फायदे नुकसान के बारे में क्या कहते हैं…..

AI द्वारा न्यूड पिक्चर्स बनाकर ब्लैकमेलिंग: नई तकनीक से उत्पन्न खतरों पर ध्यान दें

आजकल की तेज़ी से बदलती तकनीकी दुनिया में, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग न केवल सकारात्मक दिशा में किया जा रहा है, बल्कि कुछ लोग इसका दुरुपयोग करके अपराध भी कर रहे हैं। एक हालिया खतरनाक प्रवृत्ति उभर रही है, जिसमें AI की मदद से नकली न्यूड पिक्चर्स बनाई जा रही हैं, जिन्हें बाद में लोगों को ब्लैकमेल करने और उन्हें बदनाम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह एक गंभीर साइबर अपराध बनता जा रहा है, जिससे हर व्यक्ति को सावधान रहने की जरूरत है।

AI और डीपफेक का दुरुपयोग

AI के विकास के साथ, डीपफेक तकनीक का भी तेजी से विस्तार हो रहा है। डीपफेक एक ऐसी तकनीक है जिसमें किसी भी व्यक्ति की तस्वीर या वीडियो को इस हद तक मॉडिफाई किया जा सकता है कि उसे वास्तविकता से अलग करना मुश्किल हो जाता है। इस तकनीक का इस्तेमाल करके साइबर अपराधी किसी की भी बिना अनुमति या जानकारी के नकली न्यूड तस्वीरें बनाकर उन्हें धमकी देते हैं।

कैसे होता है यह अपराध?

ब्लैकमेलिंग के इस तरीके में साइबर अपराधी सबसे पहले किसी व्यक्ति की सामान्य तस्वीरें इंटरनेट या सोशल मीडिया से उठाते हैं। इसके बाद, AI-आधारित सॉफ़्टवेयर की मदद से उन तस्वीरों को डीपफेक तकनीक द्वारा मॉडिफाई किया जाता है, जिससे वे न्यूड तस्वीरों की तरह दिखाई दें। इसके बाद, उन तस्वीरों का इस्तेमाल करके व्यक्ति को धमकाया जाता है और उनसे पैसे या अन्य तरह की मांगें की जाती हैं। यह न केवल पीड़ित के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि समाज में उनकी छवि भी खराब होती है।

इसके दुष्प्रभाव

  1. मानसिक आघात: इस प्रकार के अपराध से पीड़ित व्यक्ति को मानसिक रूप से अत्यधिक दबाव और तनाव का सामना करना पड़ता है।
  2. सामाजिक प्रतिष्ठा पर प्रभाव: नकली तस्वीरें वायरल होने के बाद समाज में पीड़ित व्यक्ति की छवि धूमिल हो सकती है।
  3. आर्थिक नुकसान: ब्लैकमेलिंग के कारण लोग अक्सर अपराधियों को पैसे देने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

इससे कैसे बचें?

  1. सोशल मीडिया पर सावधानी: सोशल मीडिया पर अपनी निजी तस्वीरें और जानकारी साझा करते समय सावधान रहें। हमेशा अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स को प्राइवेट रखें और अनजान लोगों से जुड़ने से बचें।
  2. साइबर जागरूकता: खुद को और अपने आसपास के लोगों को साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूक करें। किसी भी संदिग्ध लिंक, मैसेज या व्यक्ति से सावधान रहें।
  3. कानूनी मदद लें: यदि आप इस प्रकार के किसी अपराध के शिकार होते हैं, तो तुरंत कानून प्रवर्तन एजेंसियों से संपर्क करें और उचित कानूनी कार्रवाई करवाएं।
  4. एंटी-डीपफेक तकनीक: कुछ सॉफ़्टवेयर और टूल्स ऐसे होते हैं जो डीपफेक तस्वीरों की पहचान कर सकते हैं। इन्हें पहचानने के लिए विशेषज्ञों की मदद लें।

सरकार और समाज की भूमिका

इस समस्या से निपटने के लिए सरकार और समाज दोनों को मिलकर काम करना होगा। साइबर अपराधों को रोकने के लिए सख्त कानूनों की आवश्यकता है, और लोगों को इस तकनीक के संभावित खतरों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। साथ ही, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी अपनी सुरक्षा और गोपनीयता नीतियों को और मजबूत करना चाहिए, ताकि इस तरह के अपराधों को रोका जा सके।

निष्कर्ष

AI और डीपफेक जैसी तकनीकें जितनी फायदेमंद हैं, उतनी ही खतरनाक भी हो सकती हैं यदि उनका दुरुपयोग किया जाए। ब्लैकमेलिंग और बदनाम करने के लिए नकली न्यूड पिक्चर्स बनाना एक गंभीर अपराध है, जो किसी की निजी और सामाजिक जीवन को बर्बाद कर सकता है। हमें इसके प्रति जागरूक रहना होगा और तकनीक के सकारात्मक पहलुओं को बढ़ावा देते हुए इसके नकारात्मक उपयोग को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

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