जल्द एक जल्लाद तैयार रखें : हाई कोर्ट नें क्यों कहा

Gyan Prakash Dubey

गुरुग्राम: तीन वर्षीय बच्ची के दुष्कर्म और हत्या मामले में दोषी को मौत की सजा

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 2018 में गुरुग्राम में तीन साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी सुनील को मौत की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इसे “दुर्लभतम मामलों” में से एक मानते हुए कहा कि दोषी का अमानवीय और राक्षसी आचरण समाज के लिए एक गंभीर खतरा है।

👉हाईकोर्ट का आदेश

हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस सुदीप्ति शर्मा शामिल थे, ने विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए जिला मजिस्ट्रेट को सजा के क्रियान्वयन के लिए जल्लाद नियुक्त करने और समयबद्ध योजना तैयार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अपील की अवधि समाप्त होने के बाद सजा को तुरंत लागू किया जाए।

👉घटना का विवरण

12 नवंबर 2018 को गुरुग्राम के सेक्टर-65 में बच्ची का शव नग्न अवस्था में सड़क पर खून से लथपथ मिला था। जांच में पता चला कि दोषी सुनील, जो पीड़िता का पड़ोसी था, ने बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी। डीएनए रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि पीड़िता के शरीर से मिले खून के धब्बे और अन्य साक्ष्य दोषी से मेल खाते थे।

👉विशेष अदालत का फैसला

गुरुग्राम की विशेष अदालत ने 3 फरवरी 2024 को पोक्सो अधिनियम के तहत सुनील को मौत की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने इस फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यह मामला “रेयरेस्ट ऑफ द रेयर” श्रेणी में आता है।

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