
Gyan Prakash Dubey
दुबई में ब्रिटिश युवक को नाबालिग से संबंध बनाना पड़ा महंगा, मिली एक साल की जेल की सजा
नई दिल्ली..
टीनएज के दौरान हार्मोन्स पर काबू पाना कई बार मुश्किल हो जाता है। इस उम्र में युवा अक्सर भावनाओं में बहकर ऐसे फैसले ले लेते हैं, जो बाद में उनके लिए भारी साबित हो सकते हैं। ऐसा ही एक मामला दुबई से सामने आया है, जहां एक 18 साल के ब्रिटिश युवक को 17 साल की नाबालिग लड़की के साथ संबंध बनाना महंगा पड़ गया। युवक को दुबई की अदालत ने एक साल की जेल की सजा सुनाई है।
CNN की रिपोर्ट के अनुसार, लंदन के रहने वाले मार्कस फकाना सितंबर में अपने परिवार के साथ दुबई में छुट्टियां मनाने आया था। इसी दौरान उसकी मुलाकात होटल में एक ब्रिटिश युवती से हुई। दोनों के बीच दोस्ती हुई, जो जल्द ही रोमांटिक रिश्ते में बदल गई। यह रिश्ता इतना गहरा हो गया कि दोनों ने यौन संबंध भी बना लिए।
छुट्टियों के बाद जब 17 वर्षीय लड़की वापस यूनाइटेड किंगडम लौटी, तो उसकी मां को इस रिश्ते की जानकारी मिल गई। मां ने नाराज होकर दुबई पुलिस में युवक के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी। इसके बाद दुबई पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मार्कस को गिरफ्तार कर लिया।
मार्कस ने अपनी गिरफ्तारी के अनुभव को दर्दनाक बताया। उसने कहा—
“मुझे अचानक होटल से ले जाया गया। मुझे यह भी नहीं बताया गया कि मुझे क्यों पकड़ा जा रहा है। मुझे अपने माता-पिता से बात करने की अनुमति तक नहीं दी गई। सभी चीजें अरबी भाषा में हो रही थीं, जिन्हें मैं समझ नहीं पा रहा था। मुझे इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि मैं कब जेल से बाहर आऊंगा।”
मार्कस ने आगे कहा कि उसे वकील, दूतावास या माता-पिता से संपर्क करने की अनुमति नहीं दी गई। उसने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उसका इरादा किसी कानून को तोड़ने का नहीं था।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में सहमति की उम्र 18 वर्ष तय की गई है। कानून के अनुसार, 18 साल से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाना अपराध की श्रेणी में आता है।
मार्कस ने इस बारे में सफाई देते हुए कहा—
“मुझे इस बात का अंदाजा नहीं था कि वह लड़की 18 साल की होने में केवल एक महीने दूर थी। हमने इस उम्र के अंतर को कभी मुद्दा नहीं माना, क्योंकि हम दोनों एक ही स्कूल वर्ष में पढ़ाई कर रहे थे।”
हालांकि, दुबई के सख्त कानूनों के तहत मार्कस को दोषी ठहराया गया और एक साल की जेल की सजा सुनाई गई।
मार्कस ने अपने किए पर अफसोस जताते हुए दुबई के प्रधानमंत्री और शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम से अपील की है कि उसकी सजा को माफ किया जाए। उसने कहा कि वह अपने परिवार के साथ क्रिसमस मनाने के लिए घर लौटना चाहता है।
मार्कस के परिवार ने भी दुबई सरकार से सजा में राहत देने की मांग की है।
यह मामला एक चेतावनी है कि विदेशों में कानूनों को समझना और उनका पालन करना कितना जरूरी है। हर देश के अपने नियम और संस्कृति होते हैं। दुबई जैसे रूढ़िवादी समाजों में व्यक्तिगत संबंधों को लेकर सख्त कानून लागू हैं।
NGV PRAKASH NEWS


जय गुरुजी शुकराना गुरुजी
