
हरदोई: भ्रष्टाचार का दर्दनाक चेहरा — मुख्यमंत्री आवास का छज्जा गिरने से दो युवतियों की मौत
हरदोई। सरकारी निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार चरम पर है। चंद दिन पहले ही 3.50 करोड़ रुपये की लागत से बनी पानी की टंकी पहली ही बार पानी भरते समय गुब्बारे की तरह फट गई थी। अब एक और दर्दनाक मामला सामने आया है, जिसमें मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत बना एक मकान मौत का कारण बन गया।
योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस के दावे को ठेकेदार सरेआम चुनौती दे रहे हैं और निर्माण कार्यों में भारी भ्रष्टाचार की पोल खुल रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार
चार माह पहले ही बनकर तैयार हुए मुख्यमंत्री आवास का छज्जा गिरने से दो युवतियों की मौत हो गई। मरने वालों में एक युवती की तो दो दिन बाद शादी थी। हादसे में एक महिला समेत दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। सूचना मिलने पर सीओ संडीला सत्येंद्र सिंह मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण कर पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया।
शादी की खुशियां मातम में बदलीं
अतरौली के ग्राम सिंहपुर निवासी गीता को विधवा कोटे से पिछले वित्तीय वर्ष में मुख्यमंत्री आवास आवंटित हुआ था। करीब चार महीने पहले आवास बनकर तैयार हुआ। 30 अप्रैल को गीता के जेठ परशुराम की बेटी अंजनी की शादी तय थी। शादी की तैयारियां जोरों पर थीं, रिश्तेदारों का आना-जाना लगा हुआ था।
सोमवार सुबह गीता अपने बेटे सुभाष, भतीजी अंजनी और ननद की बेटी सपना के साथ आवास के दरवाजे पर छज्जे के नीचे बैठी थीं। अचानक आठ फीट लंबा और चार फीट चौड़ा छज्जा भरभराकर गिर पड़ा और सभी को अपने नीचे दबा लिया। शोर सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और मलबा हटाकर चारों को बाहर निकाला। सभी को तत्काल सीएचसी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने अंजनी को मृत घोषित कर दिया। अन्य घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। उपचार के दौरान सपना ने भी दम तोड़ दिया। गीता और सुभाष का इलाज जारी है।
बीमार व्यवस्था पर उठते सवाल
मुख्यमंत्री आवास के छज्जे के गिरने से जहां दो परिवारों का चिराग बुझ गया, वहीं सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। कोथावां ब्लॉक के बीडीओ रामकिशोर ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि घटना उनके कार्यक्षेत्र में नहीं हुई है। वहीं तहसील प्रशासन ने पीड़ितों को आर्थिक सहायता दिलाने की बात कही है।
डोली से पहले अर्थी उठी
परशुराम अपनी बेटी अंजनी के विवाह की तैयारियों में जुटे थे। शादी के कार्ड बांटे जा चुके थे, हलवाई से लेकर शादी का सारा सामान खरीदा जा चुका था। परंतु किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। दो दिन पहले जिस बेटी की डोली उठाने की तैयारी हो रही थी, उसी की अर्थी उठाते समय पिता के हाथ कांप उठे। यह दृश्य देख हर किसी की आंखें नम हो गईं।
: NGV PRAKASH NEWS

